अंतिम दिन कथा श्रवण करने उमड़ा जनसैलाब, भक्तिभाव में लीन रहा पूरा इलाका
दलसिंहसराय।विद्यापतिनगर। वाजिदपुर में आयोजित 9 दिवसीय संगीतमय रामकथा का समापन रविवार की देर शाम भक्ति और श्रद्धा के माहौल में हुआ। अंतिम दिन कथा की शुरुआत संध्या समय हुई और देर रात तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ कथा स्थल पर जुटी रही। समापन दिवस पर लंका कांड, रावण वध और विजय के पश्चात भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने तथा उनके भव्य स्वागत का मार्मिक वर्णन किया गया। अयोध्या से पधारे कथा मर्मज्ञ आचार्य अनूप वाजपेयी ने कथा के दौरान बताया कि जब भगवान श्रीराम चौदह वर्षों का वनवास पूर्ण कर माता सीता और भ्राता लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे, तब पूरी अयोध्या नगरी दीपों से जगमगा उठी थी।
लोगों ने हर्षोल्लास के साथ अपने आराध्य का स्वागत किया। इस प्रसंग का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा के दौरान भजन-कीर्तन और संगीतमय प्रस्तुति से वातावरण भक्तिमय बना रहा। लंका कांड का वर्णन करते हुए आचार्य ने कहा कि अधर्म पर धर्म की विजय का यह प्रसंग मानव जीवन के लिए प्रेरणादायी है। रावण जैसे शक्तिशाली परंतु अहंकारी राजा का अंत यह संदेश देता है कि सत्य और धर्म की राह पर चलने वाला व्यक्ति अंततः विजयी होता है। भगवान श्रीराम की मर्यादा, त्याग और करुणा का उल्लेख करते हुए उन्होंने श्रोताओं को जीवन में आदर्शों को अपनाने का संदेश दिया। अंतिम दिन कथा स्थल श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा।
महिलाएं, पुरुष, युवा और बच्चे बड़ी संख्या में उपस्थित थे। आयोजन समिति द्वारा बैठने, प्रकाश और ध्वनि की समुचित व्यवस्था की गई थी। पूरे नौ दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन में प्रतिदिन अलग-अलग प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया, जिससे क्षेत्र में भक्ति की गंगा बहती रही। समापन अवसर पर श्रद्धालुओं ने सामूहिक आरती में भाग लिया और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। आयोजन समिति के सदस्यों ने सभी श्रद्धालुओं, सहयोगियों और ग्रामीणों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में एकता, नैतिकता और सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करते हैं।
वाजिदपुर बाजार में 9 दिनों तक चले रामकथा के दौरान कथा व्यास अनूप वाजपेई ने एक ओर जहां भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों पर आधारित विभिन्न घटनाक्रम का भावपूर्ण वर्णन किया, वहीं उपस्थित श्रद्धालुओं को उन्होंने अपने जीवन में राम को उतारने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह हमें अपने जीवन को संवारने का अवसर भी देता है कथा व्यास अनूप वाजपेयी ने बताया कि भगवान राम का जीवन प्रसंगों से सीख लेकर हमें अपने जीवन को खुशहाल और सुखमय बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान विष्णु के अवतार श्रीराम इस धरा पर मनुष्य रूप में आए, जिनके जीवन में एक से बढ़कर एक दुःख आया, बावजूद उन्होंने बिना विचलित हुए, सहर्ष दुखों का सामना किया।
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