CISF जवान सुजीत ठाकुर का असम में निधन: वैशाली पहुंचा पार्थिव शरीर
वैशाली।केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के जवान सुजीत कुमार ठाकुर का असम के गुवाहाटी में ड्यूटी के दौरान निधन हो गया। उनका पार्थिव शरीर आज वैशाली के देशरी थाना क्षेत्र स्थित उनके पैतृक गांव सुल्तानपुर पहुंचा। जवान के निधन से पूरे गांव में शोक की लहर है।
परिजनों के अनुसार, सुजीत कुमार ठाकुर पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। पिछले वर्ष उनका एक ऑपरेशन भी हुआ था। वह हाल ही में छठ पर्व की छुट्टी पर घर आए थे और पर्व समाप्त होने के बाद गुवाहाटी में अपनी ड्यूटी पर लौट गए थे। अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका निधन हो गया।
2006 में CISF में हुए थे भर्ती
सुजीत कुमार ठाकुर वर्ष 2006 में सीआईएसएफ में भर्ती हुए थे। वह अपने माता-पिता, हरेंद्र ठाकुर और कृष्णा देवी के दो बेटों और एक बेटी में सबसे बड़े थे। उनकी शादी पूजा कुमारी से हुई थी। उनके परिवार में नौ वर्षीय पुत्री और आठ वर्षीय पुत्र सहित अन्य सदस्य हैं, जो इस दुखद घटना से गहरे सदमे में हैं।जवान का पार्थिव शरीर देर रात गांव लाया गया। उनके अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिजन उमड़ पड़े। सीआईएसएफ और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर मौजूद थे। अंतिम संस्कार की तैयारियां की जा रही हैं।
पत्नी से 4 फरवरी को हुई थी आखरी बात
सीआईएसएफ जवान सुजीत कुमार की निधन पर उनकी पत्नी पूजा कुमारी ने बताया कि 4 फरवरी को उनसे आखिरी बातचीत हुई थी, उसी दिन उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद पहले उन्हें पास के चिकित्सा केंद्र में इलाज के लिए ले जाया गया। हालात में सुधार न होने पर 5 फरवरी को उन्हें दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया।वहां इलाज जारी रहा, लेकिन दुर्भाग्यवश 8 फरवरी को उनकी मृत्यु हो गई। पूजा कुमारी ने यह भी बताया कि हाल ही में उनके पति का प्रमोशन हुआ था और वह जल्द ही नई पोस्टिंग पर जाने वाले थे।
जोंडिस और लीवर की समस्या से थे पीड़ित
सीआईएसएफ जवान के पिता हरेंद्र ठाकुर ने बताया कि 8 फरवरी को उन्हें सीआईएसएफ अधिकारियों से बेटे की मृत्यु की सूचना मिली। अस्पताल पहुंचने पर उनकी आशंका सच साबित हुई। सुजीत कुमार 2006 से सीआईएसएफ में सेवारत थे और गुवाहाटी में तैनात थे.पिता के अनुसार, वह पहले से ही जोंडिस और लीवर की समस्या से पीड़ित थे। उनका विवाह 2014 में हुआ था और वह दो छोटे-छोटे बच्चों के पिता था, एक की आयु आठ व नौ वर्ष है। परिवार में वह बड़े भाई थे।
शोक संतप्त पिता ने सरकार से एकमात्र मांग करते हुए कहा है कि उनकी पुत्रवधू अथवा पोते-पोतियों को सुजीत कुमार के स्थान पर नौकरी प्रदान की जाए, ताकि परिवार के भविष्य को सहारा मिल सके।
दरअसल, CISF के जवान सुजीत कुमार ठाकुर की शहादत के बाद उनके गृहनगर सुल्तानपुर में भावभीनी विदाई दी गई। तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को गनियारी घाट तक ले जाने के लिए भारी संख्या में जुटे लोग। लोगों ने देशभक्ति के नारे लगाते हुए और तिरंगा लहराते हुए उनकी अंतिम यात्रा को गाजे-बाजे के साथ सम्मानित किया.यह दृश्य उन अमर शहीद के प्रति समाज की गहरी श्रद्धा और राष्ट्रप्रेम का प्रतीक बन गया। उनका अंतिम संस्कार सहदेई के गनियारी घाट पर हुआ।
बेटे को डॉक्टर बनाना चाहता था जवान
जवान सुजीत कुमार ठाकुर के छोटे भाई मुकेश ठाकुर ने बताया कि उनके भाई का सपना था की उनके 8 वर्षीय पुत्र डाक्टर बने, वो डॉक्टर बनने के लिए प्रेरित करते थे और कहते थे – बेटा मेरा डॉक्टर बनेगा। छोटे भाई ने बड़े भाई के इस सपने को पूरा करने का वादा करते हुए कहा, मैं अपने भतीजे को डॉक्टर बनाऊंगा ।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
