“सरस्वती पूजा आज,यहाँ देखे पूजन का शुभ मुहूर्त,पूजा अत्यंत ही शुभ और फलदायी मानी गई
Samastipur News:दरभंगा.सरस्वती पूजा न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ी है, बल्कि प्रकृति में होने वाले नवजीवन और उल्लास का भी प्रतीक है। मां बगलामुखी पीठ परिषद के संस्थापक एवं ज्योतिर्विद पं. महेश मोहन झा ने बताया कि इस वर्ष माघ शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि का प्रारंभ 22 जनवरी रात 1 बजकर 30 मिनट से 23 जनवरी को रात 12 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। 23 जनवरी को पंचमी उदय व्यापिनी होने से वसंत पंचमी 23 जनवरी शुक्रवार को मनाई जाएगी। पूजा का शुभ मुहूर्त 23 जनवरी की सुबह 6 बजकर 43 मिनट से सुबह 9 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। उसके बाद दोपहर 12 बजकर 45 मिनट से संध्या 05 बजे तक।
बसंत पंचमी के पावन दिन विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा अत्यंत ही शुभ और फलदायी मानी गई है। मां सरस्वती को प्रिय लगने वाले पीले या सफेद वस्त्र को धारण करें। बसंत मां सरस्वती की पूजा पीले या सफेद आसन पर बैठकर करें।बसंत पंचमी वाले दिन ईशान कोण या फिर कहें अपने पूजा स्थान को स्वच्छ और पवित्र करने के बाद वहां पर एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर मां सरस्वती का चित्र या मूर्ति स्थापित करें। मां सरस्वती की पूजा का प्रारंभ दाहिने हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर संकल्प के साथ करें।
“मम सर्वविद्या-बुद्धि-वि वेक-वाक्शुद्धि- सिद्ध ्यर्थं श्रीसरस्वतीदेव्याः पूजनं करिष्ये। मां सरस्वती की पूजा में उनका आवाहन या ध्यान करने के लिए दिए गए मंत्र को पढ़ें : या कुन्देन्दुतुषारहारधव ला या शुभ्रवस्त्रावृता. या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना. या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभ ृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता. सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ध्यान मंत्र को पढ़ने के बाद मां सरस्वती को पुष्प, रोली, चंदन, अक्षत, धूप, दीप, अर्पित करें।
इसके बाद माता के श्री चरणों में पुस्तक, कलम, वाद्य यंत्रों आदि को रखकर प्रणाम करें। मां सरस्वती को फल और नैवेद्य अर्पण करने के बाद उनके स्तोत्र का पाठ या फिर ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः, अथवा ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सरस्वत्यै नमः मंत्र का जप करें. बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की आरती के बगैर उनकी पूजा अधूरी मानी जाती है, इसलिए अंत में आरती अवश्य करें।
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