समस्तीपुर जिले के बैंकों में पड़ी हैं 53 करोड़ अनक्लेम्ड राशि
समस्तीपुर।जिले के विभिन्न सरकारी बैंकों में कई पुश्तों से बिना दावेदार पड़ी रकम का चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार जिले के अलग-अलग बैंकों में 1 लाख 53 हजार 984 खातों में कुल 52 करोड़ 99 लाख 98 हजार 503 रुपए अनक्लेम्ड पड़े हैं। आरबीआई के निर्देश पर अब इस सोई हुई पूंजी को उसके वास्तविक हकदारों तक पहुंचाने के लिए बैंकों ने महाअभियान शुरू कर दिया है।
इस अभियान का सबसे आश्चर्यजनक पहलू यह है कि अनक्लेम्ड खातों में केवल आम लोगों के ही नहीं, बल्कि सरकारी विभागों के खाते भी शामिल हैं, जिनमें वर्षों से करोड़ों रुपए जमा हैं और संबंधित विभाग तक उसे भूल चुके हैं। भारतीय रिजर्व बैंक के स्पष्ट निर्देश के बाद जिले के सभी प्रमुख सरकारी बैंक हरकत में आ गए हैं। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और बिहार ग्रामीण बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय, समस्तीपुर से जुड़ी सभी शाखाओं में यह अभियान चलाया जा रहा है। प्रत्येक शाखा में इस महाअभियान का नेतृत्व स्वयं शाखा प्रबंधक कर रहे हैं।
आरबीआई के निर्देशानुसार बैंकों में अनक्लेम्ड खाताधारकों की सूची सार्वजनिक रूप से चस्पा की गई है। इन सूचियों में कई ऐसे नाम सामने आ रहे हैं, जो वर्तमान पीढ़ी के लिए केवल पूर्वजों की याद बनकर रह गए थे। अब परिवार के सदस्य सूची देखकर अपने दादा-परदादा या परिजनों के खातों पर दावा कर सकते हैं, बशर्ते वे आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करें।
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के क्षेत्रीय कार्यालय के अनुसार उनके क्षेत्राधिकार में कुल 90244 खातों में 205598503 रुपए वर्षों से अनक्लेम्ड हैं। इसमें सरकारी विभागों के 732 खातों में 24784832 रूपए, संस्थागत 256 खातों में 2265088 रुपए और आम आदमी के 89256 खातों में 178548583 रुपए पड़े हैं।इस बैंक में 11 जिले की सभी शाखाएं हैं।वहीं स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के क्षेत्राधिकार में सभी तरह के 63 हजार खातों में 32 करोड़ रुपए जमा हैं।यह राशि बड़ी राशि इसलिए भी है क्योंकि इसके अंतर्गत सिर्फ समस्तीपुर जिला है और इसके 36 शाखाओं में यह राशि है। जबकि बिहार ग्रामीण बैंक क्षेत्रीय कार्यालय समस्तीपुर के अंतर्गत आने वाले जिले के शाखाओं में कुल 740 खातों में 43.80 लाख रुपए अनक्लेम्ड हैं। इसमें से सरकारी खातों में मात्र 3.28 लाख रुपए ही हैं। यानी अधिकांश राशि आम आदमी के ही हैं।
जिले में शुरू हुआ यह महाअभियान केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि लाखों परिवारों के लिए उम्मीद की किरण है। हो सकता है वर्षों पहले खोला गया कोई खाता, भूली हुई एफडी या पूर्वजों की जमा पूंजी आज भी बैंक में आपकी राह देख रही हो।अब पैसा नहीं रहेगा अनक्लेम्ड बस एक बार जांच जरूर करें।
जिन बैंक खातों या जमा योजनाओं में 10 साल तक कोई लेनदेन नहीं हुआ या जिनकी मैच्योरिटी के 10 साल बीत चुके हैं, उन्हें अनक्लेम्ड डिपॉजिट कहा जाता है। ऐसी राशि को आरबीआई एक विशेष कोष में स्थानांतरित करता है, जिसे डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड (डीईए फंड) कहा जाता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह पैसा सरकार या बैंक का नहीं होता, बल्कि पूरी तरह खाताधारक या उसके वैध उत्तराधिकारियों का ही रहता है। दावा करने पर बैंक यह राशि, और यदि खाता ब्याज वाला है तो ब्याज सहित, वापस करता है।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
