स्कूल की अनफिट बस से गिरने से छात्र की मौत:5 लाख का लगाया जुर्माना
दरभंगा में स्कूल की अनफिट गाड़ी की वजह से 10 साल के बच्चे की मौत हो गई। जिस स्कूल वाहन से वो घर लौट रहा था, उसका इंश्योरेंस, पॉल्यूशन और फिटनेस नहीं था। गाड़ी पूरी तरह से जर्जर हो चुकी थी, फिर भी स्कूल वाले उसका इस्तेमाल कर रहे थे।20 जनवरी को चालक ने अचानक तेज ब्रेक लगाई तो चलती गाड़ी का दरवाजा खुल गया और कक्षा 2 में पढ़ने वाला समर सड़क पर गिर गया और उसकी मौत हो गई। अमन के साथ 5 अन्य बच्चे भी घायल हो गए थे। इस घटना के बाद अगले दिन डीटीओ की टीम स्कूल पहुंची और अन्य गाड़ियों की भी जांच की। जिसमें पता चला कि 4 बसों का भी यहीं हाल था, उनके पेपर फेल थे।
डीटीओ ने चारों बसों को जब्त कर लिया और 5 लाख का जुर्माना लगाया है। वहीं, घटना के 5 दिन बाद स्कूल के 10 किमी दूर दुर्घटनाग्रस्त स्कूल वाहन को जब्त किया गया है। घटना वाले दिन चालक गाड़ी लेकर फरार हो गया था। मृतक छात्र के परिजन का कहना है कि स्कूल पर सिर्फ जुर्माना नहीं बल्कि उसका लाइसेंस रद्द होना चाहिए। घटना सदर थाना क्षेत्र के लोआम गांव में हुई थी। गाड़ी अमन एकेडमी की गाड़ी से हुई थी।
गाड़ी जब्ती में विरोध का करना पड़ा सामना
घटना के अगले दिन बुधवार को स्कूल परिसर में डीटीओ, एमवीआई (मोटर वाहन निरीक्षक) समेत अन्य पुलिस अधिकारियों की करीब 15 गाड़ियां लगी हुई थीं। भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती थी और स्कूल को पूरी तरह बंद रखा गया था। स्कूल प्रबंधन से जुड़ा कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति मौके पर मौजूद नहीं था।जांच के बाद डीटीओ ने 4 बसों को जब्त कर लिया। अधिकारियों ने स्कूल प्रबंधन से बसों की चाबी मांगी, लेकिन किसी ने चाबी उपलब्ध नहीं कराई। इसके बाद क्रेन मंगाकर बसों को ले जाया गया।
जैसे ही पहली बस को ले जाया गया, करीब 25 से 30 महिलाएं और 30 पुरुष स्कूल के मुख्य गेट पर पहुंच गईं और विरोध शुरू कर दिया। ये लोग स्कूल प्रबंधन से जुड़े लोग थे। महिलाओं ने कहा कि अब एक भी बस नहीं जाने दी जाएगी। मौके पर हाई वोल्टेज ड्रामा चलता रहा। अधिकारी लगातार महिलाओं को समझाने और हटाने की कोशिश करते रहे, लेकिन कोई मानने को तैयार नहीं हुआ।अंधेरा होने के बाद हालात और बिगड़ गए। देर शाम डीटीओ और एमवीआई अधिकारियों को हार माननी पड़ी और शेष बसों को वहीं छोड़कर वे दरभंगा के लिए रवाना हो गए।
मौके पर सदर थानाध्यक्ष मनोज कुमार लगातार लोगों को समझाने में लगे रहे, लेकिन विरोध शांत नहीं हुआ। बताया जा रहा है कि स्कूल परिसर में करीब 10 घंटे तक दर्जनों अधिकारी डटे रहे, लेकिन विरोध के चलते पूरी कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी।
स्कूल बसों के निरीक्षण में मिली खामियां
– किसी भी बस में फर्स्ट एड बॉक्स नहीं था।
– फायर एक्सटिंगिवीशर की व्यवस्था नहीं मिली।
– बसों की सीटों की स्थिति खराब पाई गई।
– सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे थे।
– बसों के इंश्योरेंस, फिटनेस, प्रदूषण समेत सभी कागजात फेल पाए गए।
अनफिट गाड़ियों की वजह से मेरे बेटे की मौत हुई है
मृतक छात्र के पिता मो. चमन ने स्कूल प्रबंधन पर आरोप लगाया है कि जर्जर और अनफिट वाहन में बच्चों को ढोया जा रहा था। इस कारण हादसा हुआ है। मेरा बेटा तीन साल से स्कूल में पढ़ा रहा था।मंगलवार दोपहर करीब 2:30 बजे एक अनजान व्यक्ति का फोन आया, जिसने बताया कि अमन एकेडमी की गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया है। बेटे की हालत गंभीर है। सीता पेट्रोल पंप के पास पहुंचने को कहा। जब मौके पर पहुंचा तो देखा कि स्कूल वाहन में सवार अन्य 5 बच्चे भी घायल थे और रो रहे थे।
स्थानीय लोगों ने बताया कि आपके बेटे को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने बेटे को मृत घोषित कर दिया।
स्कूल की गाड़ी बदलने के लिए कहा था, पर नजरअंदाज किया
पिता ने बताया कि घटना के बाद स्कूल के हेडमास्टर और स्कूल प्रबंधन को फोन किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। स्कूल के प्रिंसिपल मो. सलमान और स्कूल के ऑनर मो. वसीम से भी संपर्क नहीं हो सका। करीब 3 घंटे तक स्कूल गेट पर परिजनों के साथ बैठे रहे, लेकिन स्कूल प्रबंधन का कोई भी व्यक्ति बातचीत के लिए सामने नहीं आया।पहले भी स्कूल प्रबंधन से कई बार शिकायत की थी कि स्कूल की गाड़ियां जर्जर हैं और दरवाजे लॉक नहीं होते हैं। स्कूल प्रशासन ने नजरअंदाज कर दिया। स्कूल प्रबंधन ने कहा था, अगर आपको समझ में नहीं आता तो अपने बच्चा स्कूल से हटा लीजिए।
पिता ने बताया कि जिस मैजिक वाहन से बच्चे आते-जाते थे, उसमें 18 बच्चों को एक साथ भेड़-बकरी की तरह ठूंस कर बैठाया जाता था।
मृतक के पिता ने कहा कि अमन एकेडमी में करीब 900 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं और स्कूल के पास करीब 20 मैजिक वाहन हैं, जिनकी हालत बेहद खराब है। प्रशासनिक जांच के दौरान स्कूल की कई गाड़ियों के कागजात फेल पाए गए हैं।पीड़ित पिता ने जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और परिवहन विभाग से मांग की है कि अमन एकेडमी स्कूल का लाइसेंस रद्द किया जाए। सभी निजी स्कूलों के वाहनों की व्यापक जांच हो। स्कूल प्रबंधन पर आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।
उन्होंने कहा कि मेरे बेटे की कोई गलती नहीं थी। स्कूल की लापरवाही ने मेरी दुनिया उजाड़ दी। आज मेरे साथ हुआ है, कल किसी और के साथ न हो, इसलिए ऐसे स्कूलों को बंद किया जाना चाहिए।
भाई को सिर में चोट लगी थी
मृतक की बहन, जो कक्षा एक की छात्रा है और उसी वाहन में सवार थी। उसने बताया कि गाड़ी में अचानक तेज ब्रेक लगा, जिससे वाहन का पिछला हिस्सा उछल गया। इसी दौरान गाड़ी का गेट खुल गया और समर नीचे गिर गया। गिरने से पहले उसके सिर में गंभीर चोट लगी थी।
स्थानीय लोग नहीं होते तो 5 बच्चों का क्या होता
मृतक छात्र के चाचा मो. अशरफ ने कहा कि हादसे के तुरंत बाद वाहन चालक गाड़ी को मौके पर छोड़कर फरार हो गया था। बच्चे सदमे में थे, रो रहे थे और पूरी तरह घबराए हुए थे।अगर उस समय स्थानीय लोग मौके पर नहीं पहुंचते और मदद नहीं करते, तो उन पांच बच्चों के साथ क्या होता, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।विद्यालय प्रबंधन का कोई भी व्यक्ति न तो घटनास्थल पर पहुंचा और न ही घायल बच्चों की देखरेख के लिए सामने आया। भतीजे की जान चली गई, लेकिन जो बच्चे जिंदा बचे थे और जिन्हें हल्की चोटें आई थीं, कम से कम उनकी जिम्मेदारी तो स्कूल को लेनी चाहिए थी।
मो अशरफ ने प्रशासन से मांग की कि स्कूल के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी और मासूम की जान न जाए।उन्होंने कहा कि “मेरा भतीजा अब इस दुनिया में वापस नहीं आएगा, लेकिन हम चाहते हैं कि किसी और परिवार को ऐसा दर्द न सहना पड़े। इसलिए स्कूल प्रबंधन पर कड़ी कार्रवाई जरूरी है।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
