Patna

पटना में पकड़े गए 8 साइबर ठग:ऑनलाइन गेम का जाल,पूरा कंट्रोल इनके पास

पटना साइबर थाने की पुलिस ने शुक्रवार को अगमकुआं थाना क्षेत्र के आरपीजी कॉलोनी से 8 साइबर ठगों को पकड़ा है। इनमें से 4 नाबालिग हैं। ये सभी पटना में किराये के एक फ्लैट में रहते थे। ऑनलाइन गेम की मदद से लोगों से पैसे ठगते थे। इनके पास से 25 मोबाइल, 2 लैपटॉप और 4 पेमेंट स्कैनर मशीन जब्त किए गए हैं।पकड़े गए आरोपियों में मुजफ्फरपुर के मज्जमा के कुंदन, मोतिहारी के पकड़ी दीक्षित के राकेश कुमार और नालंदा जिले के रसाई बिगहा के धनराज, वंदपुर के गोलू कुमार हैं। बाकी अन्य 4 नाबालिग हैं।

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पुलिस को शक है कि इस गैंग के तार विदेश से जुड़े हो सकते हैं। पुलिस ने इनके बैंक खाते से जुड़े डॉक्यूमेंट भी जब्त किए हैं। ये सभी ऑनलाइन विज्ञापन कर लोगों को फंसाते थे।

 

सोशल मीडिया पर इनाम जीतने वाले गेम खेलने का लालच देते थे। कहते थे कि लाखों में कमाई होगी। गेम का पूरा कंट्रोल इनके पास होता था। गेम खेलने वाले को पहले जिताते थे। बाद में जब कोई बहुत अधिक पैसे दांव पर लगाता तो उसे हरा देते थे। इस तरह पैसे ठगों के पास पहुंच जाते थे।साइबर ठगी के आरोपियों के पास से 25 मोबाइल फोन और दो लैपटॉप बरामद किए गए हैं।

कैसे हुआ खुलासा?

 

साइबर क्राइम ब्रांच के DSP नीतीश चंद्र धारिया ने बताया कि साइबर थाने की पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी। पता चला था कि पटना के अगमकुआं थाना इलाके में कुछ युवक गेमिंग ऐप के जरिए साइबर ठगी कर रहे हैं। इस सूचना के आधार पर साइबर थाने की एक विशेष टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए छापेमारी की। इसमें पुलिस अधिकारी धर्मेंद्र मंडल, सोनी राय, रौशन कुमार, रमेश कुमार और साइबर थाने के अन्य जवान शामिल थे। छापेमारी के दौरान ये सभी लैपटॉप से ठगी करते मिले।

 

DSP ने बताया कि पूछताछ में सभी ने स्वीकार किया कि वे ठगी के लिए अलग-अलग बैंक खातों का इस्तेमाल करते थे। ये लोग 250-300 अलग-अलग बैंक खातों में यूपीआई पेमेंट के जरिए और सीधे खाते में पैसे मंगाते थे। वॉट्सऐप के माध्यम से QR कोड भेजते थे। जिनके खाते में पैसे मंगाते थे, उसे 5-10 फीसदी देते थे। बाकी के पैसे वापस ले लेते थे। इसके लिए भी 3-4 युवकों को रखा गया था। गेम खेलने वाले यूजर इनके खाते में पैसे भेजते थे। इस गिरोह का एक आरोपी अभी फरार है। पुलिस उसे भी पकड़ने के लिए छापेमारी कर रही है।

 

गेमिंग ऐप के जरिए कैसे करते थे ठगी?

 

साइबर थाने के एक अधिकारी ने बताया कि यह गिरोह सुनियोजित तरीके से काम करता है। गिरोह के लोग कलर चॉइस, कॉइन टॉस और यस-नो जैसे गेमिंग ऐप्स बनाते हैं। इसका विज्ञापन फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किया जाता है।ये लोग विज्ञापन इस तरह डिजाइन करते थे कि सोशल मीडिया पर सबसे ऊपर और सबसे पहले दिखाई दे। इसके लिए भारी मात्रा में पैसे खर्च किए जाते थे। ठग सोशल मीडिया ऐड यूज करते हैं। यह ऐड ऑनलाइन सट्टा गेम खेलने वाले लोगों को बार-बार दिखाया जाता है। उन्हें ज्यादा से ज्यादा पैसे कमाने का लालच दिया जाता है।

 

ऐसे ऐप प्ले स्टोर पर नहीं मिलते हैं। यूजर के फोन में ऐप इंस्टॉल हो इसके लिए उसे वॉट्सऐप या टेलीग्राम ग्रुप से जोड़कर APK देकर ऐप इंस्टॉल कराया जाता है। जब कोई यूजर विज्ञापन में दिए गए लिंक पर क्लिक करता या ऐप डाउनलोड करता तो उसे तुरंत इन ग्रुप में जोड़ा जाता है। इन ग्रुप में गेम खेलने के नियम, जीतने के तरीके और फर्जी विनर्स की कहानियां बताई जाती थी। फर्जी विनर्स के फोटो और कॉन्टैक्ट नंबर भी दिए जाते हैं। ये असल में रैकेट के लोग होते हैं। ये फर्जी विनर्स यूजर्स को विश्वास दिलाते हैं कि उन्होंने काफी कम पैसे लगाए और लाखों रुपए जीत गए।

 

 

ठगों के हाथ में रहता है गेम का कंट्रोल

 

पुलिस ने इन ठगों के काम करने का तरीका समझाया। एक अधिकारी ने बताया कि इन गेमिंग ऐप का पूरा कंट्रोल ठगों के हाथ में होता है। शुरुआत में यूजर्स को छोटी रकम जीतने दिया जाता है ताकि उन्हें भरोसा हो जाए। जैसे ही यूजर ज्यादा पैसे दांव पर लगाता है उसे हरा दिया जाता है।गेम में रेड-ब्लैक या हेड-टेल जैसे ऑप्शन होते है, जहां यूजर्स को रंग (रेड या ब्लैक) या सिक्के (हेड या टेल) को सिलेक्ट कर पैसे लगाने होते है। ठग यह देखते थे कि किस विकल्प पर कम पैसे लगे हैं और उसी को विजेता घोषित कर देते थे।

 

उदाहरण के लिए, अगर रेड कलर पर ज्यादा पैसे लगाए गए और ब्लैक पर कम, तो ब्लैक को विजेता बना दिया जाता था। इस तरह, ज्यादा पैसे लगाने वाले यूजर्स का पैसा डूब जाता था। कुछ मामलों में ठग यूजर्स को बार-बार जीतने देते थे ताकि उनका कॉन्फिडेंस बढ़े और ज्यादा पैसे लगाएं। जैसे ही यूजर बड़ी रकम लगाता, उसे हरा दिया जाता था। पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि ऐप का पूरा कंट्रोल उनके पास होता है।ठगों ने पैसे ट्रांसफर करने के लिए कई अलग कंपनियों के पेमेंट बैंक खुलवा लिए थे। दूसरे लोगों के भी खाते का इस्तेमाल करते थे। पटना में इस तरह के अपराधों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। यह रैकेट न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सक्रिय है, जिसमें पाकिस्तान और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के कनेक्शन सामने आ रहे हैं।

 

साइबर पुलिस की सलाह- अनजान लिंक्स पर क्लिक करने से बचें

 

साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अनजान लिंक्स पर क्लिक करने, गेमिंग ऐप्स डाउनलोड करने और अनजान लोगों को अपने बैंक खाते की जानकारी साझा करने से बचें। साइबर अपराध की शिकायत के लिए तुरंत 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

Pargati Singh

न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।

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