Patna

पटना-कैदी के पेट से निकले तार,पेंसिल:IGIMS के डॉक्टरों ने एंडोस्कोपी कर तीन घंटे में बचाई जान

पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। नालंदा जिले के एक सजायाफ्ता कैदी अनिकेत कुमार (काल्पनिक नाम) , जिसकी उम्र लगभग 23 वर्ष बताई जा रही है। जिसके पेट से नुकीले धातु के तार और दो पेंसिल निगल ली थीं। पेट में तेज दर्द की शिकायत के बाद उसे शुक्रवार सुबह IGIMS लाया गया, जहां डॉक्टरों ने एंडोस्कोपी के माध्यम से उसकी जान बचाई।

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IGIMS के चिकित्सा अधीक्षक मनीष मंडल ने बताया कि कैदी अनिकेत नालंदा जेल में अपनी सजा काट रहा था। पेट दर्द की शिकायत के बाद उसे पहले बेउर जेल भेजा गया। वहां के जेल डॉक्टरों ने उसकी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उसे पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) रेफर कर दिया।

 

कैदी का अल्ट्रासाउंड, ब्लड टेस्ट और एक्स-रे किया गया

 

PMCH में कैदी का अल्ट्रासाउंड, ब्लड टेस्ट और एक्स-रे किया गया। एक्स-रे रिपोर्ट देखकर डॉक्टर हैरान रह गए, क्योंकि इसमें कैदी के पेट के अंदर धातु के कई तार और अन्य नुकीली वस्तुएं फंसी हुई दिखाई दीं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उसे आगे की जांच और विशेष इलाज के लिए IGIMS भेजा गया।डॉ. मनीष मंडल के अनुसार, IGIMS में मरीज की सभी रिपोर्टों की समीक्षा की गई। इसमें पाया गया कि कोई अंदरूनी रक्तस्राव या अन्य गंभीर जटिलता नहीं थी। इसके बाद डॉक्टरों की टीम ने एंडोस्कोपी करने का निर्णय लिया, ताकि पेट में फंसी वस्तुओं को सुरक्षित रूप से निकाला जा सके।

 

एंडोस्कोपी के दौरान पता चला कि मरीज के पेट और छोटी आंत में चार धातु के तार और दो पेंसिल फंसी हुई थीं। गैस्ट्रो मेडिसिन विभाग को तुरंत अलर्ट किया गया और गैस्ट्रो सर्जरी की टीम को भी आपात स्थिति के लिए तैयार रखा गया। डॉक्टरों की टीम ने तीन घंटे की मशक्कत के बाद सफलतापूर्वक सभी वस्तुओं को बाहर निकाला और कैदी की जान बचाई।

 

पांच महीने पहले नशे की हालत में निगल लिया था तार

 

गैस्ट्रो मेडिसिन विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. राहुल कुमार, जिन्होंने पूरी प्रक्रिया का नेतृत्व किया। उन्होंने बताया कि कैदी ने ये वस्तुएं करीब पांच महीने पहले नशे की हालत में निगल ली थीं। धातु के तार बेहद खतरनाक हो सकते है,वे ग्रासनली, पेट या आंत की दीवारों को फाड़ सकते हैं, जिससे जानलेवा रक्तस्राव हो सकता है और मरीज की मृत्यु भी हो सकती थी।इसके अलावा, ये तार आंतों में फंसकर पाचन तंत्र को पूरी तरह अवरुद्ध कर देते हैं, जिसके कारण मरीज को भारी दर्द, उल्टी और मल त्यागने में गंभीर परेशानी होती है।ऐसी घातक परिस्थितियों के बावजूद IGIMS की टीम ने महज 3 घंटे की एंडोस्कोपी प्रक्रिया में सभी फंसी हुई वस्तुओं को सुरक्षित रूप से बाहर निकाल लिया। पूरे ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों की सूझबूझ और सटीक तकनीक के कारण मरीज को किसी भी बड़ी सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ी और तत्काल उसे डिस्चार्ज भी कर दिया गया।

 

IGIMS संस्थान के निदेशक डॉ. बिन्दे कुमार ने टीम की इस उपलब्धि की सराहना की। उन्होंने कहा, “ऐसे मामले बेहद दुर्लभ होते हैं। हमारे चिकित्सकों की कुशलता और त्वरित निर्णय ने इस कैदी की जान बचाई है। यह हमारे संस्थान की दक्षता का नमूना है। उन्होंने डॉ. संजीव झा, डॉ. रविकांत, डॉ. राहुल कुमार सहित पूरी टीम को बधाई दी।

Pargati Singh

न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।

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