10वीं बार CM बनेंगे नीतीश, 35 पर सिमटी महागठबंधन:29 मंत्रियों में सिर्फ एक हारे
पटना।बिहार विधानसभा चुनाव का रिजल्ट आ चुका है। NDA ने अपना घोषित चुनावी लक्ष्य हासिल किया- ‘2025, 225 फिर से नीतीश।’ NDA ने यही तय करके चुनाव की तैयारी शुरू की थी कि बिहार विधानसभा की कुल 243 सीटों में से 225 सीटें जीतेंगे। बाकी 18 सीटें बाकी विपक्षी पार्टियों में बंटेंगी। हूबहू ऐसा तो नहीं हुआ।
मगर जो हुआ, वह शायद ही होता है। उसकी जीत का नंबर 200 पार है। इतनी बड़ी जीत की उम्मीद संभवतः NDA को भी नहीं होगी। घटक दलों के तमाम बड़े नेता प्रचंड बहुमत या संख्या के रूप में 160-65 सीटों को जीतने की बात कहते रहे।
तमाम एग्जिट पोल भी 200 पार के आंकड़े तक नहीं पहुंचे, लेकिन जनता ने एनडीए को उसके घोषित लक्ष्य के बिल्कुल करीब पहुंचा दिया। महागठबंधन का सूपड़ा साफ सा हो गया। राजद का ‘MY’ (मुस्लिम-यादव) समीकरण दरका। खासकर सीमांचल के मुसलमानों ने राजद से ज्यादा AIMIM पर भरोसा किया। ‘जन सुराज’ की हवा निकल गई।
10वीं बार शपथ लेंगे नीतीश कुमार
नीतीश रिकॉर्ड 10वीं बार सीएम पद की शपथ लेंगे। रिजल्ट, कमोबेश 2010 के विधानसभा चुनाव जैसा रहा। फर्क यही कि तब जदयू सबसे बड़ी पार्टी थी। उसने 115 सीटें जीती थी। 91 सीटें जीतकर भाजपा दूसरे नंबर पर थी।
अबकी भाजपा सबसे बड़ी पार्टी रही। दूसरे नंबर पर जदयू है। इस बार की तरह तब भी जदयू-भाजपा साथ मिलकर लड़ी थी। जदयू ज्यादा सीटें लड़ी थी। अबकी जदयू और भाजपा बराबर सीटों (101-101) पर लड़ी।
चुनाव से जुड़े कुछ रोचक फैक्ट्स
कांग्रेस और ओवैसी आसपास, कांग्रेस ने 6, ओवैसी ने 5 सीटें जीतीं।
29 मंत्रियों में 28 जीते, मंत्री सुमित सिंह चकाई से हारे।
जन सुराज फ्लॉप, 99 प्रतिशत सीटों पर जमानत जब्त।
डिप्टी CM बनने जा रहे वीआईपी का खाता भी नहीं खुला।
संदेश सीट से JDU के राधाचरण साह सबसे कम 27 वोट से जीते।
रुपौली सीट से JDU के कलाधर मंडल सबसे ज्यादा 73572 वोट से जीते।
हार-जीत के 10 कारण
NDA की जीत के कारण
1. जीविका दीदीः चुनाव से पहले जीविका दीदियों को 10-10 हजार मिले। नौकरी-रोजगार, 120 यूनिट फ्री बिजली और बढ़ी पेंशन ने बड़े वर्ग को आकर्षित किया। महिला वोटों में असर दिखा।
2. जंगलराज का भय: तेजस्वी के सीएम फेस बनते ही एनडीए ने लालू-राबड़ी शासन के अपराध, रंगदारी और नरसंहार की याद दिलाई। ‘जंगलराज’ का मुद्दा उठाकर राजद को खलनायक बताया।
3. SIR का असरः SIR पर महागठबंधन के आंदोलन ने वोटरों को जागरूक किया। रिकॉर्ड मतदान हुआ, जिसका बड़ा लाभ एनडीए को भी मिला। उसका वोटर ज्यादा संगठित रहा।
4. मजबूत प्रचार: एनडीए ने समय पर सीटें बांटी। समय पर उम्मीदवार तय किए। पीएम की 20, सीएम की 84 और शाह की 38 सभाओं ने माहौल बदला। कई बड़े सक्रिय रहे।
5. डबल इंजन : नीतीश के काम पर भरोसा। ‘डबल इंजन’ की ताकत को वोटरों ने स्थिर विकल्प माना। भाजपा-जदयू के तालमेल ने बड़ा काम किया। मोदी का सूत्र ‘मेरा बूथ सबसे मजबूत’ सफल रहा।
महागठबंधन की हार के कारण
1. घोषणाएं बेअसर : महागठबंधन एनडीए की नकल करता दिखा। नीतीश सरकार ने घोषणाएं तुरंत लागू कर बढ़त ली। जबकि महागठबंधन ‘सरकार बनी तब देंगे’ वाली स्थिति में अटका रहा।
2. सीटों पर कलह : पीएम की दो सभाओं के बाद भी महागठबंधन सीट विवाद सुलझाता रहा। 12 सीटों पर फ्रेंडली फाइट रही। ‘सीएम फेस’ को लेकर लंबी खींचतान से महागठबंधन में कमजोरी और बिखरा आया।
3. कांग्रेस में विवाद : कांग्रेस के टिकट बंटवारे पर विवाद। खरीद-बिक्री के आरोप लगे। धरना-प्रदर्शन चलते रहे। सहनी की डिप्टी सीएम की चाहत और वाम दलों की अधिक सीटों की मांग ने गठबंधन की छवि बिगाड़ी।
4. कमजोर प्रचार : तेजस्वी लगभग अकेले प्रचार में लगे रहे। खड़गे, राहुल, प्रियंका की बहुत कम सभाएं हुईं। एसआईआर का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाने के बाद राहुल गांधी अचानक गायब हो गए।
5. लामबंदीः मोकामा में दुलारचंद यादव हत्याकांड को लेकर सवर्ण लामबंद हुए। फिर अनंत सिंह की गिरफ्तारी ने सुशासन का संदेश दिया। यह सब महागठबंधन के खिलाफ गया।
अब जानिए बाहुबलियों का क्या हुआ
NDA के 10, महागठबंधन से 3 बाहुबली जीते
इस बार 20 बाहुबलियों के परिवार के सदस्य चुनावी मैदान में उतरे, इनमें से 11 एनडीए की आंधी में विधानसभा पहुंच गए। छह बाहुबली उम्मीदवारों और उनके रिश्तेदारों को हराया। जेल में रहते हुए उन्होंने दूसरी बार जीत दर्ज की।
वहीं जेल में बंद राजद के रीतलाल यादव को दानापुर में भाजपा के रामकृपाल यादव ने हरा दिया। कुच्चायकोट से अमरेंद्र पांडेय, मटिहानी से बोगो सिंह, एकमा से धूमल सिंह, मनियापुर से केदारनाथ सिंह और मांझी से प्रभुनाथ सिंह के बेटे रणधीर सिंह विजयी हुए।
सीवान के शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा शहाब और विशेश्वर ओझा के बेटे राकेश रंजन पहली बार जीते। सुनील पांडेय के बेटे विशाल प्रशांत भी जोते, जबकि ब्रह्मपुर से हुलास पांडेय और मुन्ना शुक्ला की बेटी शिवानी लालगंज से हार गई।
वारिसलीगंज से अशोक महतो की पत्नी अनिता देवी, बेलागंज से मनोरमा देवी और नवादा से विभा देवी ने जीतकर विधानसभा में बाहुबली परिवारों की उपस्थिति और मजबूत कर दी।
जीत के बाद अनंत सिंह ने भोज दिया। इसके लिए 3 दिन पहले से तैयारी शुरू हो गई थी।
महुआ से हार गए तेजप्रताप
तेजप्रताप यादव महुआ से चुनाव हार गए हैं। उनकी पार्टी JJD ने हार के बाद फेसबुक पर पोस्ट किया है। इसमें लिखा है- तेजस्वी फेलस्वी हो गया। RJD को जयचंदों ने खोखला कर दिया। मोदी विश्व के मजबूत नेता हैं। NDA को उसकी एकता ने जिताया।
28 महिलाएं विधानसभा पहुंचीं
BJP की10 महिला विधायक, JDU की 9
बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार एनडीए, महागठबंधन और जन सुराज सहित लगभग सभी पार्टियों ने महिलाओं को टिकट दिया। कुल 88 महिलाएं चुनावी रण में उतरीं। इनमें से 28 ने जीत दर्ज की।
सबसे बेहतर प्रदर्शन भाजपा ने किया, जिसके 10 महिला उम्मीदवार विजयी रहीं। इसके बाद जदयू की 9 महिलाओं ने जीत हासिल की। महागठबंधन में शामिल राजद ने 23 महिलाओं को मैदान में उतारा, लेकिन उनमें से केवल 3 उम्मीदवार ही जीत सकीं।
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (आर) ने 6 महिलाओं को मौका दिया। इनमें से 3 ने जीत हासिल की। हम का स्ट्राइक रेट 100% रहा। उसकी दोनों प्रत्याशी जीत गईं। दिलचस्प रूप से, सबसे ज्यादा 33 महिलाओं को टिकट देने वाले जन सुराज को एक भी सफलता नहीं मिली।सोर्स: दैनिक भास्कर।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
