मौसम का हाल:बिहार मे अबकी ठंड और अधिक सताएगी,कोहरा-शीतलहर रहेगा..
पटना।मानसून अभी ठीक से विदा भी नहीं हुआ था कि ठंड दरवाजे पर आकर खड़ी हो गई है। सुबह और शाम के वक्त हल्की सर्दी का एहसास होने लगा है, जबकि दिन और रात के तापमान में लगातार गिरावट देखी जा रही है। केंद्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, इस बार दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ सकती है। इस साल मानसून ने भी तय समय से सात दिन पहले दस्तक दी थी।
पहाड़ों पर समय से पहले जोरदार बर्फबारी शुरू हो गई है। उत्तर व मध्य भारत में रात का तापमान तेजी से घटने लगा है। अक्टूबर के दूसरे सप्ताह से ही सुबह और शाम सिहरन का एहसास होने लगा है। दोपहर की धूप में जलन नहीं रह रही है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यह ला नीना के कारण हो रहा है। यानी इस साल ठंड अधिक सताएगी। इसका मतलब है कि प्रशांत महासागर के पानी का तापमान सामान्य रहने से वायुमंडल की हवाएं अधिक ठंडी रहेंगी इससे ठंडी हवाओं का प्रवाह भारत तक अधिक आएगी और बिहार में ठंड की शुरुआत पहले होगी और देर तक रहेगी।
सर्दियों का ला नीना इफेक्ट क्या है?
ला नीना ही वह घटना जो भारत में जल्दी सर्दियां ला सकती है। ला नीना, व्यापक अल नीनो दक्षिणी दोलन का एक चरण है, जो एक जलवायु परिघटना है। यह मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में समुद्र के तापमान में परिवर्तन के साथ-साथ वायुमंडल में उतार-चढ़ाव के बारे में है।
बिहार से दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई सोमवार को हो गई। 17 जून से 30 सितंबर तक राज्य में कुल 686.3 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जो कि सामान्य 992.2 मिलीमीटर की तुलना में लगभग 31 प्रतिशत कम है। राज्य के कई जिलों में बारिश में कमी दर्ज की गई है। इस साल जुलाई में सबसे कम बारिश रिकार्ड की गई। जुलाई में 41 प्रतिशत कम बारिश हुई। सबसे अधिक बारिश सितंबर महीने में सितंबर में 246.4 एमएमए वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य से महज 9% कम रही।
ला नीना के समय वातावरण में नमी
ला नीना के समय वातावरण में नमी अधिक रहती है। इससे कोहरे और शीतलहर की घटनाएं अधिक होंगी। पिछले दो-तीन सालों से पश्चिम विक्षोभ में कमी होने और वायुमंडल का तापमान अधिक रहने से शीत लहर की घटनाएं कम हो रही है। ला नीना के असर से पश्चिम विक्षोभ अधिक आएगा।बदला
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
