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होटल में फाइनेंसर ने सुसाइड से पहले अपनी पत्नी के नाम सुसाइड नोट में लिखी,प्रिय बिन्नी माफ करना…

पटना।प्रिय बिन्नी मुझे माफ करना। मैं तुम्हें कुछ नहीं दे पाया। जो मैं आज करने जा रहा हूं। इससे तुम जीवन भर शर्मिंदा रहोगी। मैं बेबस हूं। मेरे पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं था। हो सके तो मुझे माफ कर देना।’पटना के एक होटल में फाइनेंसर उमेश सिंह (52) ने सुसाइड करने से पहले ये बातें अपनी पत्नी के नाम सुसाइड नोट में लिखी थी। इसके बाद उन्होंने मौत को गले लगा लिया।

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मुंगेर में मिनी बैंक से चर्चित उमेश कुमार सिंह की लाश बुधवार को पटना के कोतवाली थाना इलाके के मगध होटल में पंखे से लटकी मिली थी। वे मुंगेर के बिंदबारा के रहने वाले थे। बताया गया कि उमेश ने 100 से अधिक लोगों से डबल करने के नाम पर पैसे लिए थे.उमेश ने अपने एक पन्ने के सुसाइड नोट में पीएम से लेकर मुख्यमंत्री और डीएम का जिक्र किया है। उन्होंने लिखा, ‘आदरणीय प्रधानमंत्री/मुख्यमंत्री/DM जी मैं निर्दोष हूं। मैं कोई ठग नहीं हूं। निष्पक्ष CBI जांच होगी तो मामले का खुलासा हो जाएगा। मैंने लोगों से रुपए ब्याज पर लगाने के लिए थे, इस बारे में मेरे परिवार के लोगों को जानकारी नहीं है।

 

मैं सुसाइड से पहले इसलिए गायब हुआ ताकि मैं यह देखना चाहता था कि मेरे नहीं रहने के बाद मेरे परिवार के साथ क्या सलूक हो रहा है। लोगों ने वैसा ही सलूक किया, जिसकी मुझे आशंका थी। मेरे बच्चों को कृपया सुरक्षा मुहैया कराई जाए और इस घटना की निष्पक्ष जांच हो।’उमेश बीते 17 तारीख से लापता था। लापता होने के बाद उनकी स्कूटी, कपड़े और जूते दुमंठा घाट पर मिले थे। हालांकि लोगों को इनके सुसाइड के बारे में विश्वास नहीं हो पा रहा था। कोई रुपए लेकर बैंकॉक तो कोई विदेश भागने की बात कर रहा था। लापता होने के 5 दिन बाद जब कोतवाली इलाके के होटल गली के मगध होटल से जब उनकी बॉडी मिली तो यह बात पूरे इलाके में आग की तरह फैल गई।

 

प्रतिष्ठित लोगों में थी उमेश की गिनती

 

उमेश कुमार सिंह संपन्न घर से था। इलाके में प्रतिष्ठित लोगों में गिनती होती थी। अपनी शाख पर उमेश गांव के लोगों से 2 प्रतिशत के ब्याज पर रुपए लेकर शहर के साहूकारों को 3 प्रतिशत पर लगाने लगा। जो साहूकारों के यहां से रिटर्न के ब्याज के रुपए मिलते, खुद से इस रुपए को घर-घर घूमकर पहुंचा देता था।

 

हजारों में शुरू किया पैसे लगाना जो लाखों तक पहुंचा

 

महीने के 4 से 5 तारीख तक सूद के रुपए सबको मिल जाते थे। लोगों में इस तरह से वो अपनी शाख और विश्वास मजबूत करते चले गए। शुरुआती दिनों में 50,000 से लाख रुपए तक लगाते थे। लेकिन जैसे जैसे विश्वास बढ़ता गया, वैसे वैसे मोटी रकम उठाने लगे और उसे मार्केट में लगाने लगे। एक समय यह भी आया कि उमेश सिंह का इलाके में तूती बोलने लगा। हर मजबूर, जरूरतमंद उनसे रुपए लेने पहुंचने लगा।

 

 

होटल के कमरे में फंदे से लटका मिला उमेश।

देखते-देखते एक बड़ा नेटवर्क तैयार हो गया। अचानक पिछले 3 महीने से उनकी स्थिति खराब होने लगी। जो साहूकारों के यहां रुपए लगाए थे, वो फंसते चला गया। साहूकारों ने ब्याज के रुपए देने बंद कर दिए। जिसके बाद लोगों को रुपए समय से नहीं मिल पाए। लोगों ने एक से दो महीने तक इंतजार किया। उमेश सिंह ने लोगों को जो डेट दिया, सभी फेल हो गए। कुछ लोगों को चेक दिया, वो भी बाउंस कर गया। धीरे धीरे प्रेशर बढ़ता चला गया। कर्ज देने वाले वसूली के लिए घर पर आने लगें। दबाव में आकर आत्महत्या कर लिया।

 

होटल के कमरा नंबर 4 में ठहरा था उमेश

 

होटल के स्टाफ विपिन शर्मा ने बताया कि ‘उमेश कमरा नंबर 4 में ठहरे थे। 17 अक्टूबर की दोपहर 12:45 बजे होटल में अकेले आए थे। रात में 3000 रुपए होटल के कमरे के लिए जमा कराए थे। बुधवार सुबह सफाईकर्मी कमरा साफ करने के लिए पहुंचा तो गेट नहीं खुला। इसके बाद स्टाफ ने कोतवाली थाने को सूचना दी। पुलिस होटल पहुंचकर कमरे में घुसी तो अंदर लाश पड़ी थी।जानकारी के मुताबिक, 17 अक्टूबर को उमेश घर से निकला था। घर वापस नहीं लौटा तो घर वाले काफी खोजबीन की। फिर कासिम बाजार थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने उमेश की स्कूटी, कपड़ा और जूता दुमंठा घाट से बरामद किया है।बताया जा रहा है कि उमेश ब्याज पर रुपए लगाने के नाम पर 100 से अधिक लोगों से रुपए की ठगी की थी। उमेश करीब 10 वर्षों से गांव के लोगों से 2 प्रतिशत के ब्याज पर मोटी रकम ले रहा था। फिर उस रकम को 3 प्रतिशत के ब्याज पर साहूकारों और जरूरत के अनुसार लोगों को पैसे देता था। इससे जो हर महीने ब्याज के तौर पर रिटर्न आते थे, उसमें से 2 प्रतिशत उन लोगों तक पहुंचा देता था, जिनके रुपए होते थे।

 

बीच का एक प्रतिशत मुनाफे के तौर पर रख लेता था। इसके जरिए उसने खूब संपत्ति अर्जित की। पिछले 3 महीने से मार्केट में उसके रुपए फंस गए थे। इस कारण वह लोगों को ब्याज नहीं दे पा रहा था। इसको लेकर उसके घर पर हर दिन पैसे देने वाले लोग पहुंचने लगे थे। लोगों से परेशान होकर वो 17 अक्टूबर की सुबह निकल गया था। इसी दबाव में आकर उसने आत्महत्या कर ली।

Pargati Singh

न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।

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