Samastipur

समस्तीपुर:डॉल्फिन का अस्तित्व किसी भी नदी तंत्र के जैविक स्वास्थ्य का निशानी: कुणाल

समस्तीपुर। मोहिउद्दीननगर : डॉल्फिन न केवल हमारे जल संसाधनों की समृद्धि की प्रतीक है बल्कि हमारे पारिस्थितिक तंत्र की स्थिरता के लिए भी आवश्यक है. यह जलवायु परिवर्तन एवं मानव गतिविधियों के प्रभावों के प्रति संवेदनशील संकेतक भी है. डॉल्फिनों की मुस्कान ही नदियों के स्वास्थ्य की पहचान है. यह बातें रविवार को रसलपुर स्थित स्कूल के सभागार में डॉल्फिन दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए जलज परियोजना के प्रोजेक्ट अस्सिटेंट कुणाल कुमार सिंह ने कही. अध्यक्षता गणेश सिंह ने की. संचालन शंकर सिंह ने किया. संगोष्ठी का आयोजन जल शक्ति मंत्रालय, नमामि गंगे परियोजना, भारतीय वन्य जीवन संस्थान, देहरादून एवं जलज परियोजना की ओर से संयुक्त रूप से किया गया.

Dss WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
bihar whatsapp Channel Join Now

 

 

वक्ताओं ने कहा कि डॉल्फिन का अस्तित्व किसी भी नदी तंत्र के जैविक स्वास्थ्य का निशानी भी है. जहां पर ये जीवित रहती हैं, वहां की जल गुणवत्ता और जैविक विविधता उच्च स्तर की होती है. जब ये स्वस्थ रहती हैं तो नदियां भी जीवंत रहती है. यदि डॉल्फिन बचेंगी तो नदियां बचेंगी और यदि नदियां बचेंगी की तो ही जीवन बचेगा. डॉल्फिन केवल एक जीव नहीं बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है जिनका उल्लेख कई लोग कथाओं में भी मिलता है. इस दौरान डॉल्फिन संरक्षण के लिए किया जा रहे सरकारी प्रयासों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की गई.

 

 

साथ ही गंगा तटियों क्षेत्र में रह रहे लोगों से डॉल्फ़िन के बचाव को लेकर तत्पर रहने की अपील की गई. इस दौरान बाल गंगा प्रहरियों ने डॉल्फिन संरक्षण के लिए विभिन्न स्लोगनों के माध्यम से जागरूकता रैली निकाली. इस दौरान जलज परियोजना के सहायक ने गंगा के रसलपुर घाट पर बाल गंगा प्रहरियों को डॉल्फिनों की अटखेलियां दिखलाई. मौके पर सुभाष कुमार सिंह, निकेश कुमार, रमण कुमार, पल्लवी कुमारी, अमीषा कुमारी, कृपा कुमारी, कंचन कुमारी, रजनी कुमारी, रानी, सुप्रिया,बबीता, सृष्टि, आर्या, कन्हैया, केशव, मुस्कान अनुज मौजूद थे.

Pargati Singh

न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।

error: Content is protected !!