मुजफ्फरपुर में खतरे के निशान के करीब बूढ़ी गंडक,पलायन को मजबूर ग्रामीण
पटना।मुजफ्फरपुर जिले में बागमती और बूढ़ी गंडक नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। बूढ़ी गंडक नदी खतरे के निशान के करीब है। जिससे लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। गायघाट प्रखंड के कई गांवों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। खासकर लोमा पंचायत में कई परिवारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सरकारी सहायता नहीं मिलने से नाराजगी
नदी का जलस्तर बढ़ने से कई घरों में पानी घुस गया है। इससे खाने-पीने की भारी समस्या उत्पन्न हो गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की ओर से अब तक किसी तरह की सहायता नहीं दी गई है। हालांकि, पंचायत प्रतिनिधियों की पहल पर कई स्थानों पर सामूहिक रसोई केंद्र शुरू किए गए हैं, जिससे लोगों को थोड़ी राहत मिली है।बीते शुक्रवार को लोमा गांव में एक दर्दनाक हादसा हुआ। पैर फिसलने से 8 साल की बच्ची शिवानी कुमारी बागमती की उपधारा में बह गई। एसडीआरएफ टीम ने 22 घंटे की मशक्कत के बाद शव बरामद किया। इस घटना के बाद गांव में मातम का माहौल है। लोग डरे हुए हैं।
बूढ़ी गंडक भी लाल निशान के करीब
इधर, बूढ़ी गंडक नदी का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। रविवार को यह 51.73 मीटर से बढ़कर 51.88 मीटर तक पहुंच गया है। खतरे का निशान 52.53 मीटर है। बढ़ते जलस्तर के कारण अखाड़ाघाट, झीलनगर, आश्रमघाट, शेखपुर ढ़ाब, नाजिरपुर, चंदवारा और लकड़ी ढ़ाई मोहल्ले जलमग्न हो गए हैं। लोग थर्माकोल के नाव का सहारा लेकर आवाजाही कर रहे हैं।
मजबूरन लोग कर रहे पलायन
स्थानीय लोगों का कहना है कि अब तक प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य शुरू नहीं हुआ है। आश्रमघाट निवासी सूरज कुमार ने बताया कि करीब एक दर्जन मोहल्लों में बाढ़ का पानी घुस चुका है। आंगन और किचन तक जलजमाव है। लोग अपना सामान लेकर रिश्तेदारों और किराए के मकानों में शरण ले रहे हैं। बाढ़ग्रस्त इलाकों में दवा, राशन और अन्य जरूरी वस्तुओं की किल्लत बढ़ गई है।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
