श्रीमद्भागवत कथा में आचार्य शुभम्म हाराज ने कहा जीवन में संतोष होना बहुत जरूरी है
पटना। भागलपुर।कहलगांव खुटहरी काली मंदिर प्रांगण में श्रीमद्भागवत कथा के सप्तम दिवस व कथा के अंतिम दिन वृंदावन धाम से पधारे आचार्य शुभम् रामानुज जी महाराज ने कहा कि संतोष ही मनुष्य के जीवन का सबसे बड़ा धन है. यदि कोई व्यक्ति पूरी जिंदगी धन संचित करता है और करते-करते उसकी उम्र गुजर जाती है
. फिर भी यदि जीवन में उसको संतोष नहीं आया, तो सारा कर्म मिट्टी है. जीवन में संतोष होना बहुत जरूरी है. आचार्य ने सुदामा जी महाराज का सुंदर सा चरित्र श्रवण कराते हुए उपदेश दिया कि भगवान समदर्शी हैं सुदामा जी महाराज जैसे अकिंचन भक्त को अपनी शरण प्रदान करते हैं स्वीकार करते हैं. जब तक हमारे जीवन में संतोष रूपी धन नहीं आ जाता तब तक चाहे जितना हम धन कमा ले,
हम इस संसार के सबसे बड़े गरीब कहलाते हैं. जिस दिन हमारे अंदर संतोष आ जायेगा कि प्रभु की कृपा से जो प्राप्त है वही पर्याप्त है. यह भावना जब आ जाए तो इस संसार के सबसे बड़े अमीर हम कहलायेेंगे. भगवान सर्व समर्थ हैं. उनके लीलाओं व उनके चरित्र पर हमें संशय नहीं करना चाहिए. कलयुग में जीव मुक्त होना चाहता है, तो भगवान का नाम ही एक ऐसा संसाधन है जिससे प्रभु को प्राप्त कर सकता है. गुरुपीठ पूजन के उपरांत श्री भागवत कथा जी को विश्राम दिया गया. मौके पर काली पूजा समिति के सदस्य मौजूद थे।
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