आज से शुरू होगा चार दिवसीय विशेष पूजा,आज खुलेगा माता का पट, भक्त कर सकेंगे दर्शन
पटना.आज शारदीय नवरात्र की सप्तमी को माता का पट खोल दिया जाएगा। आज माता कालरात्रि की पूजा और मध्यरात्रि में महानिशा पूजा होगी। ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा ने पंचांगों के हवाले से बताया कि सप्तमी तिथि में माता दुर्गा का पट मूल नक्षत्र और सौभाग्य योग में खोला जाएगा।
आज से शुरू होगा चार दिवसीय विशेष पूजा
आचार्य राकेश झा ने कहा कि आज पट खुलने के बाद श्रद्धालु अगले चार दिनों तक माता की विशेष पूजा करेंगे। पट खुलने के बाद श्रद्धालुओं को माता का विहंगम दर्शन प्राप्त होगा। आज पत्रिका प्रवेश तथा मध्यरात्रि में महानिशा पूजा की जाएगी। फिर मंगलवार 30 सितंबर को महाष्टमी में माता महागौरी की पूजा के साथ श्रृंगार पूजा भी किया जाएगा। वहीं, महानवमी 1 अक्टूबर बुधवार को सिद्धिदात्री माता का पूजा, दुर्गा सप्तशती पाठ का समापन, हवन, पुष्पांजलि व कन्या पूजन किया जाएगा। आश्विन शुक्ल दशमी गुरुवार 2 अक्टूबर को विजयादशमी पर्व के रूप में मनाएंगे। इसी दिन देवी की विदाई और जयंती धारण किया जाएगा।
कालरात्रि की पूजा से दूर होंगे दुःख व भय
ज्योतिषी झा के मुताबिक मां कालरात्रि की आराधना विशेष फलदायी होती है। देवी अपने उपासकों को काल से बचाती हैं अर्थात उनकी अकाल मृत्यु नहीं होती। इनके नाम के उच्चारण मात्र से ही भूत, प्रेत, राक्षस और सभी नकारात्मक शक्तियां दूर भागती हैं। मां कालरात्रि दुष्टों का विनाश, ग्रह-बाधाओं, शत्रुओं से भी छुटकारा दिलाती है। इनके उपासक को अग्नि-भय, जल-भय, जंतु-भय, शत्रु-भय, रात्रि-भय नहीं होता है।
वैदिक व बांग्ला पध्दति में होता है कन्या पूजन
पुराणों के अनुसार नवरात्र में कन्या पूजन का विशेष महत्व है। तीन वर्ष से लेकर नौ वर्ष की कन्याएं साक्षात माता का स्वरूप मानी जाती है। नवरात्र में बांग्ला पद्धति के पूजा करने वाले भक्त अष्टमी तिथि को कन्या पूजन करते है। वहीं, वैदिक सनातन पद्धति वाले श्रद्धालु महानवमी को हवन के बाद कन्या पूजन करते है। कन्या पूजन के लिए एक, तीन, नौ या इससे अधिक कन्याओं के पूजन का विधान है। देवी
कन्या में साक्षात भगवती का वास
पंडित झा के अनुसार एक कन्या की पूजा से ऐश्वर्य, दो कन्या की पूजा से भोग और मोक्ष, तीन कन्याओं की अर्चना से धर्म, अर्थ व काम, चार की पूजा से राज्यपद, पांच की पूजा से विद्या, छ: की पूजा से सिद्धि, सात की पूजा से राज्य, आठ की पूजा से संपदा और नौ कन्याओं की पूजा से पृथ्वी के प्रभुत्व की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में दो साल की कन्या कुमारी, तीन साल की त्रिमूर्ति, चार साल की कल्याणी, पांच साल की रोहिणी, छ: साल की कालिका, सात साल की चंडिका, आठ साल की शाम्भवी, नौ साल की दुर्गा और दस साल की कन्या सुभद्रा मानी जाती हैं।
महासप्तमी पूजन व पट खुलने का शुभ मुहूर्त
मूल नक्षत्र: देर रात 03:23 बजे तक
सौभाग्य योग: रात्रि 11:36 बजे तक
अमृत मुहूर्त: प्रातः 05:42 बजे से 07:11 बजे तक
शुभ योग मुहूर्त: सुबह 08:41 बजे से 10:10 बजे तक
अभिजित मुहूर्त: दोपहर 11:16 बजे से 12:03 बजे तक.
चर-लाभ-अमृत मुहूर्त: दोपहर 01:09 बजे से शाम 05:37 बजे तक
त्रिपुष्कर योग: शाम 06:35 बजे से रात्रि 07:27 बजे तक
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
