समस्तीपुर ट्रैफिक पुलिस होगी हाईटेक, बॉडी वॉर्न कैमरे से लैस होगी निगरानी
समस्तीपुर.ट्रैफिक व्यवस्था अब पूरी तरह तकनीक से लैस होने जा रही है। जिले को पुलिस मुख्यालय से लगभग 50 अत्याधुनिक बॉडी वॉर्न कैमरे मिले हैं, जिन्हें ट्रैफिक ड्यूटी और वाहन जांच में तैनात पुलिसकर्मियों को उपलब्ध कराया जाएगा। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, एसपी अरविंद प्रताप सिंह के द्वारा एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन कर ट्रैफिक पुलिस कर्मियों के बीच इन कैमरों का वितरण किया जा सकता है। इन कैमरों को पुलिसकर्मियों की वर्दी के सामने लगाया जाएगा ताकि ड्यूटी के दौरान पुलिस और वाहन चालकों के बीच होने वाली प्रत्येक बातचीत और घटनाक्रम ऑटोमेटिक रूप से रिकॉर्ड हो सके। ताकि वाहन जांच के दौरान पारदर्शिता बरती जा सके।
ट्रैफिक पुलिस के साथ-साथ वाहन जांच में तैनात अन्य बलों को भी यह कैमरे दिए जाएंगे। कैमरा बंद पाए जाने पर संबंधित पुलिसकर्मी पर विभागीय कार्रवाई होगी। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य सिर्फ निगरानी नहीं बल्कि जवाबदेही भी तय करना है। कैमरों को ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन सिस्टम से जोड़ा जाएगा। जिससे वीडियो या फोटो के आधार पर त्वरित ई-चालान की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी। इसके लिए लाइव मॉनिटरिंग डैशबोर्ड के माध्यम से वरीय अधिकारी कैमरे की रिकॉर्डिंग को कहीं से भी ऑनलाइन देख सकेंगे। ट्रैफिक पुलिस को पहले ही हैंडहेल्ड डिवाइस दिए गए थे जो ई-चालान जनरेट करते हैं, लेकिन अब यह नया सिस्टम ट्रैफिक उल्लंघनों जैसे ओवरस्पीडिंग, रेड लाइट जम्पिंग, बिना हेलमेट ड्राइविंग और मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाने पर तत्काल कार्रवाई की सुविधा देगा। इससे नियम उल्लंघन पर न सिर्फ त्वरित दंड सुनिश्चित होगा बल्कि अदालतों पर लंबित मामलों का बोझ भी घटेगा।
विभाग के अनुसार, यह कदम पारदर्शिता और आधुनिक पुलिसिंग का प्रतीक होगा। नया सिस्टम आम लोगों के साथ-साथ पुलिसकर्मियों पर भी बराबरी से लागू होगा। मुख्यालय से स्पष्ट निर्देश जारी किया गया है कि जो भी पुलिसकर्मी ट्रैफिक नियमों की अवहेलना करते हैं, जैसे हेलमेट न पहनना, सीट बेल्ट न लगाना, तेज गति से वाहन चलाना या ड्यूटी के दौरान मोबाइल पर बात करना आदि, उनके खिलाफ भी ई-चालान काटा जाएगा। इतना ही नहीं, अगर तय समय में चालान की राशि जमा नहीं होती है तो संबंधित पुलिसकर्मी के वेतन से वसूली की जाएगी। इसके अलावा, जिले से प्रत्येक माह ट्रैफिक चालान का डेटा रिपोर्ट मुख्यालय को भेजा जाएगा, जिसमें यह साफ-साफ दर्शाया जाएगा कि कितने विभागीय कर्मियों पर कार्रवाई हुई और कितनों ने चालान की राशि जमा की। अगर कोई चालान 90 दिनों तक लंबित रहा तो वाहन का रजिस्ट्रेशन और चालक का ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
