बच्चों को छोड़ मां संग गंगा स्नान करने गई थी कंचन, दोनों की मौत,सड़क हादसे में मां-बेटी सहित नौ लोगों की मौत
पटना.दनियावां हादसे में गंभीर रूप से घायल पांच लोगों को पीएमसीएच लाया गया। इनमें रास्ते में ही उदेशा देवी की मौत हो गई, जबकि अन्य घायलों में सविता देवी, काजल कुमारी, नीलम देवी और पूनम देवी का इलाज इमरजेंसी वार्ड में चल रहा है। इनकी स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। चिकित्सकों के मुताबिक पूनम का सिर बुरी तरह फट गया और बायां पैर टूट गया है। सबिता का पूरा चेहरा जख्मी है। इन मरीजों के सिर में भी चोट है और शरीर के अन्य अंग जख्मी हैं।
पूनम देवी की हालत सबसे गंभीर है। डॉक्टरों ने सुबह 11 बजे ही उनके सिर की चोट का पता लगाने के लिए ब्रेन सीटी स्कैन की सलाह दी थी। लेकिन, परिजनों को ट्रॉली नहीं मिली, जिससे वे पूनम को जांच के लिए नहीं ले जा सके। मरीज के भाई शिवम ने बताया कि ट्रॉली की व्यवस्था के लिए उन्हें घंटों तक अस्पताल के कंट्रोल रूम का चक्कर लगाना पड़ा। शाम करीब 5 बजे, यानी सलाह दिए जाने के 6 घंटे बाद स्कैन हो पाया। इस जांच के लिए उन्हें 3800 रुपए भी खर्च करने पड़े। उधर, पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. आईएस ठाकुर ने बताया कि घायलों का इलाज डॉक्टरों की देखरेख में चल रहा है और उन्हें परेशानी न हो इसका भरसक प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, मरीज के परिजन अस्पताल में मूलभूत सुविधाओं की कमी, ट्रॉली की अनुपलब्धता और बाहर से जांच कराने के दबाव को लेकर काफी परेशान और नाराज दिखे।
डीएम ने दुख प्रकट किया
दनियावां प्रखंड के शाहजहांपुर थाना क्षेत्र के दनियावां-हिलसा सड़क मार्ग पर शनिवार की सुबह हुए सड़क दुर्घटना में नौ लोगों की मृत्यु पर डीएम डॉ. त्यागराजन एसएम ने दुख जताया है। बताया कि ऑटो और हाइवा के टक्कर के कारण यह दुर्घटना हुई। यह काफी दुखद है। परिजनों के साथ उनकी संवेदनाएं हैं। लोगों को हरसंभव सहायता प्रदान की जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही थाना, ट्रैफिक पुलिस और एंबुलेंस घटना-स्थल पर भेज दिया गया। घायलों को इलाज के लिए पीएमसीएच भेजा गया।
मां को फोन किया तो पुलिस ने उठाया
दनियावां के शाहजहांपुर में शनिवार की सुबह भीषण सड़क हादसे में मां-बेटी सहित नौ लोगों की मौत हो गई। मां उदेषा देवी और बेटी कंचन पांडेय का पोस्टमार्टम पीएमसीएच में हुआ। वे नालंदा के हिलसा के मलावां गांव की रहने वाली थीं। पोस्टमार्टम हाउस के बाहर परिजनों की भीड़ लगी थी। कंचन का भाई धनंजय छह साल के भांजे को साथ लेकर एकटक मां और बहन के शव को देख रहा था।
आंखों में आंसू भरे हुए थे। भांजे को सीने से लगाए धनंजय पूछने पर फफक-फफक कर रोने लगा। कहा कि सुबह पांच बजे मां-बहन उठी और गंगा स्नान के लिए जाने लगी। बहन ने अपने तीनों बच्चों को मेरे पास ही छोड़ दिया। हमने मजाक भी किया था कि तीनों को मेरे पास छोड़ के जा रही हो, सब मेरा दिमाग खराब कर देगा। बहन बोली-मामा हो तो इतना तो करना पड़ेगा। इसके बाद मां-बेटी कपड़ा और पूजा का सामान लेकर गंगा स्नान के लिए निकल गई। धनंजय ने बताया कि मेरे बहनोई दिल्ली में एक निजी कंपनी में काम करते हैं। राखी में बहन अपने तीनों बच्चों के साथ गांव आई थी। हमें क्या पता था कि अब मां-बेटी लौट कर घर नहीं आएगी।
धनंजय बदहवास था। रोते-रोते कहा कि सुबह जब हम जगे तब मां के मोबाइल पर फोन किया। कुछ पूछना था। एक रिंग हुआ लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया। तब हमने दोबारा फोन किया। इस बार फोन एक पुलिसकर्मी ने उठाया। अपना परिचय देते हुए उन्होंने कहा कि यहां एक्सीडेंट हो गया है। यह किसका नंबर है? कई लोग हादसे में मर गए हैं। मुझे विश्वास नहीं हुआ तो मैंने बहन के नंबर पर फोन किया। उसका फोन बंद आ रहा था। भाग कर हमलोग घटनास्थल पहुंचे। घटनास्थल का नजारा देखकर भरोसा ही नहीं हो रहा था। चारों तरफ लाशें बिछी थीं
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
