Patna

पीएमसीएच ने नहीं दिए कई कागजात:कोरोना इलाज में 2.53 करोड़ की गड़बड़ी

पटना।कोरोना काल (2020-22) के दौरान पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) में इलाज के नाम पर 2 करोड़ 53 लाख 53 हजार रुपए की अनियमितता उजागर हुई है। यह खुलासा बिहार सरकार के वित्त विभाग के अंकेक्षण निदेशालय की ऑडिट रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि गड़बड़ी की राशि इससे भी अधिक हो सकती है, क्योंकि कई महत्वपूर्ण दस्तावेज ऑडिट टीम को उपलब्ध नहीं कराए गए।

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ऑडिट टीम द्वारा साल 2020-21 और 2021-22 में कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए कोरोना उन्मूलन कोष से प्राप्त राशि से किए गए व्यय की जांच की गई। जांच में पाया गया कि इलाज के लिए 33.97 लाख की दवाएं खरीदी गईं, और पूरा भुगतान सिर्फ एक फार्मा कंपनी को किया गया।

 

पीएमसीएच का 16 मार्च 21 का एक आदेश है, जिसमें चार प्रकार की दवा और इम्पलांट की चर्चा है। इसमें फार्मा कंपनी को इथिकल (ब्रांडेड) दवाओं की एमआरपी पर 22 से 25 प्रतिशत की छूट देने को कहा गया है। ऑडिट टीम ने इस पर आपत्ति दर्ज की और कहा कि ऐसी स्थिति में यह फर्म पर निर्भर करता है कि वह 22 से 25 प्रतिशत के बीच किसी भी दर पर दवाओं की आपूर्ति कर सकता है। ऐसे में दर अनुमोदन का क्या औचित्य है।

 

दस्तावेज नहीं दिए

 

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में भी इसी अनुमोदित दर पर एक मात्र चयनित फर्म से दवा खरीद की गई। ऑडिट रिपोर्ट में इसे वित्तिय अनियमितता माना गया है। ऑडिट टीम ने आयुष्मान भारत योजना के तहत खरीदी गई दवाओं के कागजात मांगे, लेकिन उपलब्ध नहीं कराए गए। इससे दवा, सर्जिकल सामग्री और इम्पलांट पर कुल खर्च का आकलन नहीं हो सका।

 

गैस पाइपलाइन में गड़बड़ी

 

कोरोना वार्ड में 1668 मानवबल दिखाए। लेकिन जांच में केवल 1324 मिले। शेष 344 के लिए 1.43 लाख रुपए का अतिरिक्त भुगतान किया गया। बिना टेंडर 1.32 करोड़ से ज्यादा की गैस पाइपलाइन विस्तारीकरण पर भी खर्च किया गया। मरीजों के आहार पर 6.5 लाख और इनोवा गाड़ी भाड़े पर लेने के लिए 4.77 लाख रुपए खर्च किए गए। जिन पर भी आपत्ति की है।

 

एमआरपी छूट में मनमानी

 

रिपोर्ट के अनुसार कंपनी को इथिकल दवाओं पर 2-25%, सर्जिकल पर 40-50%, इम्पलांट पर 40-45% और जेनरिक दवाओं पर 50-60% की छूट देने को कहा गया। यह भी आपत्ति उठाई गई कि जब छूट की सीमा तय नहीं, तो सप्लायर अपनी मर्जी से दर तय कर सकता है। 5 लाख तक का ही क्रय किया जा सकता था। लेकिन 2021-22 में कुल 33 लाख 97 हजार 205 रुपए की दवाएं खरीदीं।

 

क्रय समिति बनाने में भी अनियमितता

 

ऑडिट में यह भी कहा गया कि स्वास्थ्य विभाग की तरफ से किसी भी सरकारी मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में मशीन, उपकरण, औषधि या रासायन की खरीद के लिए निर्धारित क्रय समिति का गठन किया जाना है। पीएमसीएच अधीक्षक ने जो टीम बनाई उसमें संबंधित विभाग के विभागाध्यक्ष की जगह मुख्य आकस्मिक चिकित्सा पदाधिकारी को रखा जो स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार नहीं है।

 

तीन कंपनियों से कोटेशन आए। लेकिन जेनरिक दवाओं का कोटेशन केवल एक से मिला। ऐसे में क्रय समिति को दर अनुमोदन की प्रक्रिया को रद्द कर देना चाहिए था। फिर भी उसे टेंडर दे दिया। यह बिहार वित्त संशोधन नियमावली 2005 का उल्लंघन है।

ऑडिट का जवाब भेजेंगे

ऑडिट टीम का जबाव उस टीम को भेजा जाएगा। इस पर हमें कुछ नहीं कहना है। -आईएस ठाकुर, अधीक्षक, पीएमसीएच

Pargati Singh

न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।

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