मधुश्रावणी व्रत को लेकर गांव में उत्सव का माहौल, मायके में रहती है..
समस्तीपुर.मिथिलांचल में मधुश्रावणी पर्व श्रावण कृष्ण पंचमी को शुभारंभ हुआ। नवविवाहित सुहागन इस व्रत को आस्था रखती हैं। मधुश्रावणी व्रत को लेकर सबसे ज्यादा उत्साह और उमंग नवविवाहिता कन्याओं में देखने को मिलता है। नवविवाहित सुहागन श्रावण कृष्ण पंचमी के दिन से सावन शुक्ल तृतीया तक यानी 14 दिनों तक दिन में बस एक समय भोजन करती हैं।
नवविवाहिता विवाह के पहले वर्ष में ही इस पर्व को करती है। आज पहला दिन गौरी पूजन, नाग पूजन किया गया। वहीं इस बार तेरह पूजा है। प्रत्येक दिन शाम में नवविवाहित सभी श्रृंगार कर नए वस्त्र पहन कर फुल लोडने निकलती है एवं वही फूल से नाग देवता की पूजा की जाती है। कृष्णापुरी में साधना झा ने इस व्रत को करने के लिए संकल्प लिया। इस पर्व के दौरान महिला पुजारी कथा भी करती है तथा विधि पूर्वक पूजा कराई गई।
आमतौर पर नवविवाहिता इन दिनों में मायके में रहती हैं और साज ऋंगार के साथ नियमित शाम में फूल चुनती हैं और डाला सजाती हैं। फिर इस डाले के फूलों से अगले दिन विषहर यानी नागवंश की पूजा करती हैं। महिला कथावाच का द्वारा पहला दिन पूजा के विधि विधान के बारे में बताया गया साथी विचार के जन्म कथा पर विस्तार पूर्वक बताया।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
