Begusarai

बेगूसराय में पानी के गलत उपयोग का आरोप;पेप्सी प्लांट के खिलाफ 15KM लंबी पद यात्रा

बेगूसराय के पेप्सी प्लांट पर भूजल दोहन का आरोप है। इसका मतलब है कि जमीन के नीचे स्थित पानी का गलत उपयोग किया जा रहा है। इसके खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए हैं। जल दोहन से परेशान क्षेत्र के 100 लोगों ने आज 11 अलग-अलग मांग को लेकर 15 किलोमीटर लंबी पदयात्रा निकाली।पदयात्रा बरौनी जीरोमाइल गोलंबर पर राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर शुरू हुई। पपरौर, देवना, हरपुर, सिंघौल, हर-हर महादेव चौक होते हुए कलेक्ट्रेट के उत्तरी द्वार पर यात्रा पहुंची।

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प्रतिनिधिमंडल ने डीएम कार्यालय में मांग से संबंधित ज्ञापन दिया। पद यात्रा का नेतृत्व कर रहे प्रियम रंजन और रोशन कुमार सहित अन्य लोगों ने कहा कि बेगूसराय को बिहार का औद्योगिक राजधानी का दर्जा मिला हुआ है।

 

भूजल की उपलब्धता में भीषण गिरावट

 

इसी कड़ी को विकसित करते हुए बरौनी स्थित असुरारी में पेप्सी प्लांट वरुण बेवरेजेज की स्थापना की गई, जो भू-जल आधारित इकाई है। इस संयंत्र के स्थापना काल से ही क्षेत्र में भूजल की विकट स्थिति उत्पन्न हो रही है। आर्थिक दृष्टिकोण से कृषि और पशुपालन आधारित क्षेत्र में भूजल की गुणवत्ता व उपलब्धता में गिरावट हो रहा है।

 

क्षेत्र के करीब पचास गांव और पांच लाख की आबादी सीधे तौर पर प्रभावित हो रहा है। भविष्य की चिंताएं और बढ़ रही है। पेप्सी के अधिकारी से संपर्क करने के कोशिश के बाद भी सकारात्मक पहल नहीं की गई है, जो जनमानस और पर्यावरण के हित में हो। किसी भी औद्योगिक संयंत्र का मूल भाव स्थानीय सक्षम लोगों को रोजगार होता है।

 

प्राकृतिक संसाधन का संरक्षण होना चाहिए

 

आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधन का संरक्षण होना चाहिए। जिसमें यह पेप्सी सयंत्र अब तक नाकाम साबित हो रहा है। जब जल की संकट उठ रही है, तो जान माल की सुरक्षा और उनके पालन-पोषण का चुनौती हम सब के सामने खड़ा हो रहा है। जिससे जानलेवा बीमारी का बढ़ना, संक्रमण का फैलाव व भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो रही है।जब तक पेप्सी प्लांट पानी का ऑप्शनल व्यवस्था नहीं करे, तब तक संयंत्र में जल आधारित काम पर रोक हो। 15 किलोमीटर की परिधि में स्थित जल स्रोत मृतप्राय पोखर, नहर, तलाब आदि के संरक्षण की जिम्मेदारी लेकर संरक्षित करे। क्षेत्र कृषि आधारित है और जल संकट की वजह से कृषि काम प्रभावित हो रहे हैं।

 

रोजगार की भागीदारी 75 प्रतिशत तक करने की मांग

 

तकनीकी और गैर तकनीकी क्षेत्र में स्थानीय लोगों के रोजगार की भागीदारी 75 प्रतिशत तक की जाए। संयंत्र के बंद होने की स्थिति में जीवन यापन के लिए निर्भर कर्मियों को जीवन यापन भत्ता प्रदान करे। 15 किलोमीटर में स्थिति विद्यालय, महाविद्यालय, सरकारी कार्यालय, खेल मैदान, व पंचायत भवन में शुद्ध पेय जल की व्यवस्था करे।संयंत्र BIADA की खाली पड़ी जमीन पर वृक्षारोपण करें, जिससे क्षेत्र के वातावरण को रहने योग्य बनाया जा सके। भूजल संरक्षण के लिए किए गए प्रयास और उसका प्रभाव जनहित में साझा हो, उसमें कोताही बरतने पर कानूनी कार्रवाई हो।

 

संयंत्र के मुख्य द्वार पर डिस्पले बोर्ड के माध्यम से अंग्रेजी और हिंदी में भूजल व पर्यावरण पर संयंत्र से पड़ने वाले प्रभाव को प्रदर्शित किया जाए, जिससे आम जनमानस को जागरूक किया जा सके।पदयात्रा में शामिल लोगों ने कहा कि जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम-1974 को प्रभावी रूप से लागू किया जाए। भूजल मॉनिटरिंग और संरक्षण के संबंध में शोध संस्था की स्थापना किया जाए। पेप्सी बेगूसराय से विलुप्त हो रही नदियों व उसके स्रोत पर लोगों को जागरूक करें। मौके पर विभिन्न संघ-संगठन के लोग शामिल थे।

Pargati Singh

न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।

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