Samastipur

निलंबित ASI के पास करोड़ों की जमीन,2008 में सिपाही में बहाल हुआ था,प्रमोशन से बना ASI, एक साल से था गायब

समस्तीपुर।जहानाबाद से निलंबित एएसआई सरोज सिंह को एसटीएफ और पुलिस ने समस्तीपुर के सुल्तानपुर गांव से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी शुक्रवार को हुई। गिरफ्तारी से पहले सरोज और उसके साथियों ने पुलिस पर 4-5 राउंड फायरिंग भी की। जब एसटीएफ ने मोर्चा संभाला तो फिर सरोज ने सरेंडर कर दिया। सरोज 2008 में सिपाही में बहाल हुआ था।प्रमोशन के बाद एएसआई बना। पोस्टिंग जहानाबाद ट्रैफिक पुलिस में हुई। 20 सितंबर 2024 को वह छुट्टी पर गया।

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फिर ड्यूटी पर नहीं लौटा। जांच के बाद जहानाबाद एसपी ने उसे निलंबित कर दिया। सरोज के साथ पुलिस ने उसके चाचा परशुराम सिंह, चचेरे भाई विश्वजीत सिंह, निशांत कुमार और मुन्ना यादव को भी गिरफ्तार किया। इनके पास से एक एके-47, एक इंसास राइफल, एक कारबाइन, 133 जिंदा कारतूस और अन्य हथियार बरामद किए गए।सरोज को एसटीएफ पटना लेकर आ गई। गिरफ्तार मुन्ना समस्तीपुर का और निशांत कुमार बेगूसराय का रहने वाला है।

 

 

 

पटना में गर्दनीबाग थाना के झुनझुन महल स्थित वाटिका अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 4 बी में छापेमारी कर 3 लाख 40 हजार नकद, नोट गिनने की मशीन, 1.40 करोड़ का जमीन का कागज बरामद किया। उसके बाद पुलिस सरोज को लेकर सगुना मोड़ स्थित नया टोला में महानंद राय के मकान में छापेमारी की 11 लाख जमीन के एग्रिमेंट के पेपर, रुपसपुर में बीएल इंफ्रा एंड प्राइवेट लिमिटेड के कार्यालय से 40 प्लॉट के एग्रिमेंट के कागज बरामद किया, जिसका मूल्य 2 करोड़ है। पुलिस ने वैशाली के महनार के अलीपुर में सरोज के ससुर अरुण कुमार सिंह के घर पर भी छापेमारी की।

 

कौन है निलंबित एएसआई सरोज

 

{20 सितंबर 2024 को सरोज छुट्टी पर चला गया। 12 अप्रैल 2025 तक ड्यूटी पर नहीं लौटा। जहानाबाद एसपी ने जांच करवाई। जांच अधिकारी समस्तीपुर सरोज के गांव पहुंचे, लेकिन वह नहीं मिला। फिर मोहिद्दीनगर थाने से उसका आपराधिक इतिहास का पता चला।{सरोज पर मोहिद्दीनगर थाना में 2014 से 2024 तक हत्या के प्रयास, डकैती, लूट, आर्म्स एक्ट आपराधिक साजिश समेत 9 केस दर्ज हैं। 2 मई को जहानाबाद एसएसपी ने उससे 7 दिन में स्पष्टीकरण मांगा था। स्पष्टीकरण नहीं मिलने पर उसके निलंबित कर दिया गया।

 

सरोज समस्तीपुर से लेकर पटना में जमीन की दलाली, प्रॉपर्टी डीलिंग का काम कर रहा था। उसने करोड़ों की संपत्ति अर्जित की। वह सेना में नौकरी दिलाने के नाम पर भी सेटिंग किया करता था। सूत्रों के अनुसार, सरोज ने गांव के ही मुखिया प्रिंस सिंह और उसके सहयोगी नवीन सिंह सहित पांच लोगों की हत्या की योजना बनाई थी। सरोज का प्रिंस से दियारा में जमीन कब्जाने का विवाद था। इसके लिए उसने एके-47 और इंसास जैसे हथियार जुटाए थे। सरोज का नाम 2016 में लोजपा नेता बृजनाथी सिंह की हत्या में भी सामने आया था। बृजनाथी की हत्या 5 फरवरी 2016 को दीदारगंज में हुई थी। एके-47 से उनकी हत्या की गई थी। हत्याकांड में डबलू झा, मुन्ना, शिबू, सुनील यादव समेत कई आरोपी गिरफ्तार हुए थे। जिस एके-47 से हत्या हुई, उसे डबलू झा लेकर आया था पर मौके पर वह बरामद नहीं हुई। जांच में पता चला कि हत्या के वक्त सरोज पुलिस की वर्दी में था और एके-47 समेत अन्य हथियार लेकर फरार हो गया था। डबलू झा के हथियार सरोज के घर में ही रखे जाते थे। सरोज सिंह पुलिस की नौकरी की आड़ में संगठित अपराध का संचालन करता रहा।

 

कैसे पकड़ाया… एसटीएफ भी सरोज को पिछले कई दिनों से तलाश रही थी। इसी बीच एसटीएफ को गुरुवार की रात को पता चला कि सरोज और उसके गिरोह के लोग सुल्तानपुर में जमा हैं। उसके बाद एसटीएफ और समस्तीपुर थाने की पुलिस ने शुक्रवार की सुबह को सरोज के घर की घेराबंदी कर दी।

Pargati Singh

न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।

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