डॉ.राजेंद्र कृषि विश्व. इसरो के साथ मिल कर करेगा काम,किसानों के लिए बना यंत्र
समस्तीपुर स्थित डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय कार्बन फार्मिंग के क्षेत्र में इसरो (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) के साथ मिलकर काम करेगा। ये जानकारी डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ पीएस पांडे ने गुरुवार को विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय खरीफ कार्यक्रम के मौके पर दी।कुलपति ने कहा कि इस अनुसंधान परियोजना के लिए इसरो की तरफ से फंड भी उपलब्ध करवाया जाएगा। इससे संबंधित पत्र आज ही मिला है। उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय की अनुसंधान के क्षेत्र में प्रगति को दर्शाता है। लेकिन अब अनुसंधान के क्षेत्र में और तेज प्रगति लाने की आवश्यकता है।
विश्वविद्यालय में अभी हाल ही में 89 नए फैकल्टी सदस्यों ने अपना योगदान दिया है। नये वैज्ञानिकों में ऊर्जा है और आगे बढ़ने की महत्वाकांक्षा है। अनुभवी वैज्ञानिकों और नये वैज्ञानिकों के साथ मिलकर अगले कुछ सालों में एक नई अनुसंधान के क्षेत्र में एक क्रांति लाने की आवश्यकता है।
डिजिटल एग्रीकल्चर के क्षेत्र में विश्वविद्यालय ने किया काम
अनुसंधान किसानों को ध्यान में रख कर किया जाना चाहिए। डिजिटल एग्रीकल्चर के क्षेत्र में विश्वविद्यालय ने काफी काम किया है। लेकिन बहुत सारे काम किये जाना बाकी है। केसर की खेती मशरूम की ही तरह वातानुकूलित वातावरण में की जा सकती है। इसकी खेती की कम खर्च में संभावना तलाशने का निर्देश उन्होंने वैज्ञानिकों को दिया।कुलपति ने वैज्ञानिकों से कहा कि बिहार में और देश भर में छोटे और मध्यम जोत के किसानों की संख्या काफी अधिक है। विश्वविद्यालय ने किसानों के लिए यंत्र बनाया है। लेकिन छोटे किसानों के लिए नये यंत्रों को बनाए जाने की आवश्यकता है।
यंत्र विकसित करने की मांग
छोटी जोत की जरूरत के हिसाब से यंत्र विकसित किया जाये। डॉक्टर पांडेय ने इंजीनियरिंग के वैज्ञानिकों से कहा कि स्मार्ट मशीन विकसित किये जाने चाहिए, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैश हों और जरूरत के मुताबिक स्वयं निर्णय लेने में सक्षम हों ।कृषि के क्षेत्र में ग्लोबल जरूरतों और निर्यात की संभावनाओं पर भी काम करने का निर्देश वैज्ञानिकों को दिया गया है।
कुलपति ने कहा कि पैकेजिंग और शेल्फ लाइफ बढ़ाने पर भी अनुसंधान में तेजी लानी होगी, जिससे कि ट्रांसपोर्टेशन के दौरान उत्पाद की गुणवत्ता बनी रहे। डॉ पांडेय ने कहा कि विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत विश्वविद्यालय व बिहार के योगदान की सराहना की गई है। इस अभियान के दौरान किसानों के बहुत सारी समस्याओं के बारे में जानकारी मिली हुई है। उन्होंने वैज्ञानिकों से कहा कि वे किसानों की समस्याओं पर आधारित अनुसंधान परियोजना विकसित करें।
अरहर, हल्दी, मक्का के प्रभेद विकसित
बाह्य विशेषज्ञ के रूप में नवसारी और जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ ए आर पाठक ने कहा कि विश्वविद्यालय में डिजिटल एग्रीकल्चर के क्षेत्र में काफी अच्छा काम किया है। इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय ने अरहर, हल्दी, मक्का, गन्ना, धान और गेंहूं के कई प्रभेद विकसित किए हैं, जो किसानों की ओर से पसंद किये जा रहें हैं।विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों को स्पीड ब्रीडिंग और माइक्रोबायोम के क्षेत्र में भी काम करने की आवश्यकता है।
निदेशक अनुसंधान डॉ एके सिंह ने कहा कि लीची के शेल्फ लाइफ बढ़ाने को लेकर अनुसंधान के अच्छे परिणाम मिले हैं। इसके परीक्षण के विभिन्न दौर के बाद निष्कर्षों को जारी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त किसानों की समस्याओं पर आधारित ग्यारह अनुसंधान परियोजना पर भी इन दो दिनों से चर्चा की जायेगी।
सुझाव के आधार पर मिली स्वीकृति
बाह्य विशेषज्ञों के विचार और सुझाव के आधार पर उसे स्वीकृति दी जायेगी। निदेशक पीजीसीए ने अपने कॉलेज में चल रहे विभिन्न अनुसंधान की प्रगति के बारे में जानकारी दी। अनुसंधान परिषद में की बैठक दो दिन तक जारी रहेगी, जिसमें बाह्य विशेषज्ञ के रूप में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मिलेट रिसर्च के निदेशक डॉ सी तारा सत्यार्थी और भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान कानपुर के निदेशक डॉ जीपी दीक्षित भी शिरकत करेंगे.बैठक में विश्वविद्यालय में चल रहे अनुसंधान परियोजनाओं की समीक्षा की जायेगी और ग्यारह नये परियोजना भी स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किये जायेंगे। अनुसंधान परिषद की बैठक के दौरान सभी कालेजों के डीन, विभागाध्यक्ष , सह निदेशक अनुसंधान डॉ मुकेश कुमार, डॉ एस के ठाकुर, समेत सभी वैज्ञानिकों ने भाग लिया।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
