3 बार गिरा अगुवानी ब्रिज,अब स्टील–कंक्रीट से बन रहा:दो शिफ्ट में चल रहा काम
पटना.उत्तर बिहार को दक्षिण बिहार से जोड़ने वाला सुल्तानगंज-अगुवानी घाट फोर लेन पुल का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। यह जनवरी 2027 तक तैयार हो जाएगा।गंगा नदी पर बन रहे इस 3.16 किलोमीटर लंबे ब्रिज के चालू होने से दक्षिण बिहार से उत्तर बिहार आने-जाने में करीब 60 किमी की दूरी कम हो जाएगी.3 बार धराशाई हो चुके पुल के हिस्से का नए सिरे से निर्माण शुरू हो गया है। इस बार पुल के सुपर स्ट्रक्चर में बदलाव किया गया है। नई डिजाइन IIT रुड़की ने तैयार की है।
अब इसे कंपोजिट स्टील बीम कंक्रीट डेन केबल स्टे तकनीक पर बनाया जा रहा है। यह पुल मोकामा गंगा ब्रिज और दीदारगंज विदुपुर सिक्स लेन की तर्ज पर बनेगा। पुल के काम का थर्ड पार्टी ऑडिट होगा।पुल के टूटे हिस्से के साथ बाकी अधूरे काम और एप्रोच रोड का निर्माण भी साथ में शुरू किया गया है। प्रबंध निदेशक हर 15 दिन पर काम का इंस्पेक्शन करेंगे। इंजीनियर प्रमुख, कार्य प्रबंधन और पथ निर्माण विभाग भी हर महीने निरीक्षण करेंगे
नई डिजाइन क्या है?:
यह पुल कंपोजिट स्टील बीम कंक्रीट डेन केबल स्टे डिजाइन पर बनेगा। पहले इसे एक्स्ट्रा-डोज केबल ब्रिज तकनीक पर बनाया जा रहा था।
3 बार पुल का हिस्सा गिरने के बाद IIT रुड़की ने एक्स्ट्रा डोज केबल को हटाकर कंपोजिट स्टील तकनीक से ब्रिज बनाने का सुझाव दिया है।कंपोजिट स्टील बीम, कंक्रीट डेक और केबल-स्टे ब्रिज क्या हैः यह एक ऐसा पुल है, जिसमें स्टील बीम, कंक्रीट डेक और केबल-स्टे सिस्टम का एक साथ उपयोग किया जाएगा। यह पुल का मॉर्डन डिजाइन है, जो स्टील और कंक्रीट दोनों की ताकत को बढ़ा देता है। साथ ही केबल-स्टे सिस्टम से अतिरिक्त फायदा मिलता है।
एक्स्ट्रा-डोज केबल ब्रिज क्या हैः एक ऐसा पुल, जिसमें केबल डेक को सीधे टावर से नहीं जोड़ते हैं बल्कि डेक के नीचे केबल को एक पॉइंट से दूसरे पॉइंट तक ले जाते हैं। डेक के ऊपर कम टावर की ऊंचाई होती है।IIT रुड़की की रिपोर्ट में क्या थाः IIT रुड़की ने पुल के स्ट्रक्चर और डिजाइन की जांच की। जून 2023 में बिहार सरकार को रिपोर्ट सौंपी। इसमें कहा गया कि एक्स्ट्रा-डोज केबल ब्रिज तकनीक पर काम चल रहा था। इसके फाउंडेशन और स्ट्रक्चर में गलती की गई है।
पथ निर्माण से मिली जानकारी के मुताबिक, पुल की डिजाइन सही नहीं रही है। IIT रुड़की ने अपनी रिपोर्ट में ब्रिज के कोड पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में कहा गया था कि तय मापदंड पर कोड नहीं स्थापित हुए.रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि ब्रिज का लोड भी एक बड़ी समस्या रही। मापदंड के हिसाब से पुल का लोड अधिक था। पुल के डिजाइन फेल्योर में फोर्स का रोल अहम था।हाईकोर्ट के आदेश पर 6 जून को ब्रिज का काम शुरू हुआ। इसे 18 महीने के अंदर पूरा करना है।
दो शिफ्ट में चल रहा काम
IIT रुड़की की नई डिजाइन को कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद 6 जून से ब्रिज बनाने का काम शुरू हो गया है। ब्रिज को 4 अलग-अलग यूनिट में बांटकर दो शिफ्ट में काम चल रहा है। 270 से अधिक मजदूर रोज काम कर रहे हैं। हालांकि, गंगा में जलस्तर बढ़ने के कारण काम में रुकावट आ रही हैं और कार्य की गति कुछ धीमी हो गई है।
गुणवत्ता की मॉनिटरिंग के लिए कमेटी बनी
पथ निर्माण विभाग के अपर मुख्य सचिव मिहिर कुमार सिंह ने बताया, ‘पुल की गुणवत्ता की जांच के लिए एक सुदृढ़ परियोजना क्रियान्वयन इकाई (PIU) बनाई गई है। इसमें अनुभवी इंजीनियर, IIT या अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों के समूह की एक स्वतंत्र तकनीकी टीम भी शामिल होगी।’सिंह ने बताया, ‘पहले चरण में पहुंच पथ का निर्माण कार्य कराया जाएगा, ताकि आने-जाने में दिक्कत ना हो। परिवर्तित सुपर स्ट्रक्चर के अनुरूप IIT रुड़की के तकनीकी परामर्श के अनुसार नींव में आवश्यक सुधार कराया जा रहा है।’
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
