समस्तीपुर के किसान लीची से बना रहे शहद:लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए भी रिसर्च जारी
समस्तीपुर के किसान अब लीची से शहद बना रहे हैं। इसके अलावा, लीची की फसल को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए भी रिसर्च जारी है, जो शुरुआती दौर में है। दरअसल, शनिवार को शहर के डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद सेंट्रल एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में शनिवार को लीची उत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बिहार के विभिन्न जिलों से आए लीची किसानों ने अपनी अपनी वैराइटी का प्रदर्शन किया। जिससे शाही लीची से लेकर चायना, बेदाना, बोंबई, मंदराजी, योगदान आदि वैराइटी शामिल है।
मुख्य अतिथि के रूप में केंद्र सरकार के हार्टीकल्चर कमिश्नर डॉ प्रभात कुमार, कुलपति डॉक्टर पीएस पांडेय पहुंचे। इन्होंने संयुक्त रूप से किसानों के स्टॉल का निरीक्षण किया। किसानों से बातचीत की। लीची और लीची हनी को बढ़ावा देने के लिए बात की गई है।
इस मौके पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि बिहार की धरती में लीची बसी है। राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय लीची उत्पादन के क्षेत्र में लगातार रिसर्च कर रही है। जिससे किसानों को फायदा मिल रहा है।
लीची को सड़ने से बचाने के लिए रिसर्च जारी
लीची 15- 20 दिनों में खराब होने लगता है। सड़ने लगता है। लीची को सड़ने से बचाने के लिए यूनिवर्सिटी रिसर्च कर रही है, ताकि लीची को नए फसल के आने तक वह सुरक्षित रहे। यह रिसर्च सफल होता है, तो किसानों की आमदनी बढ़ जाएगी। किसान अपने उत्पाद को महीना तक सुरक्षित रख सकेंगे, जिससे उनका कारोबार और विकसित होगा। उन्हें ज्यादा से ज्यादा फायदा मिलेगा।
मौके पर विश्वविद्यालय की कुलपति डॉक्टर पीएस पांडे ने कहा कि किसानों को अलग-अलग तरह की लीची की खेती करनी चाहिए। रिसर्च में कई अन्य नई प्रजाति की लीची भी आई है, जिसकी खुशबू भी है। दरअसल, इस कार्यक्रम का आयोजन ही किसानों को जागरूक करने के लिए किया गया था।
लीची के किसानों के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं हैं। लीची को खराब होने से रोकने के लिए रिसर्च अभी शुरुआती स्टेज में है। अगर ऐसी तकनीक निकाल लेते हैं, जिससे लीची को काफी दिनों तक प्रिजर्व किया जा सके, तो किसानों के लिए फायदेमंद होगा।
लीची फर नेशनल सेमिनार का भी आयोजन
इस मौके पर विश्वविद्यालय के विद्यापति भवन सभागार में लीची और लीची से बने शहद पर सेमिनार का भी आयोजन किया गया। जिसमें देश के विभिन्न से डेलिगेट्स भाग ले रहे हैं। देश के विभिन्न विश्वविद्यालय से वैज्ञानिक की उपस्थित हुए हैं।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
