Saturday, April 5, 2025
Patna

“वक्फ बिल का विरोध,7 मुस्लिम नेताओं ने JDU छोड़ी:कहा- मुख्यमंत्री ने भरोसा तोड़ा

पटना.JDU ने वक्फ संशोधन बिल पर मोदी सरकार का समर्थन किया है। इसके बाद से CM नीतीश कुमार की पार्टी में घमासान मचा हुआ है। बगावत शुरू हो गई है। एक के बाद मुस्लिम नेताओं का इस्तीफा जारी है। अब तक बिल को समर्थन देने से नाराज 7 मुस्लिम नेताओं ने पार्टी छोड़ दी है।

इनमें पूर्व प्रदेश सचिव एम. राजू नैयर, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव मोहम्मद शाहनवाज मलिक, बेतिया जिला के उपाध्यक्ष नदीम अख्तर, प्रदेश महासचिव सिएन मो. तबरेज सिद्दीकी अली, भोजपुर से पार्टी सदस्य मो. दिलशान राईन और खुद को मोतिहारी के ढाका विधानसभा सीट से पूर्व प्रत्याशी बताने वाले मोहम्मद कासिम अंसारी शामिल हैं।नवादा जिले के जेडीयू जिला सचिव मोहम्मद फिरोज खान ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। फिरोज खान ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दोहरी नीति का हवाला देते हुए यह कदम उठाया है।

मुस्लिम नेताओं ने वक्फ बिल के समर्थन पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि पार्टी ने लाखों मुसलमानों का भरोसा तोड़ा है। हालांकि, पार्टी ने दावों को खारिज किया है।वहीं, डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने वक्फ संशोधन बिल को नहीं मानने वालों को देशद्रोही बताया है। विजय सिन्हा ने कहा-

‘यह पाकिस्तान नहीं, हिंदुस्तान है। जहां संविधान का शासन चलता है। नरेंद्र मोदी की सरकार में कानून का पालन कंपलसरी है, जो लोग संसद में पास हुए कानून को नहीं मानेंगे, वे देशद्रोही हैं। ऐसे लोगों की तुरंत गिरफ्तारी होनी चाहिए।अपने दफ्तर में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने वक्फ बिल का विरोध करने वालों को भ्रष्टाचारी बताते हुए कहा, ‘जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं, उन्हें चिह्नित कर कार्रवाई की जानी चाहिए। बेटा बाप से बगावत कर रहा है। खुद लालू यादव ने ऐसे कड़े कानून की मांग की थी।’

वहीं, जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार का कहना है कि राजद नेताओं ने मुस्लिम संपत्तियों पर कब्जा कर लिया है। अनवर हुसैन, जिन्हें ‘कबाब मंत्री’ के रूप में जाना जाता है, MLC नामांकन के लिए संपत्ति के सौदे में शामिल थे। हालांकि, नीतीश कुमार हमेशा अल्पसंख्यकों के साथ खड़े रहे हैं। सीएम नीतीश हैं तो अल्पसंख्यक महफूज हैं।

पप्पू यादव बोले- नीतीश कुमार हमेशा सेक्युलर रहेंगे

इधर, बिल पर जदयू के समर्थन को लेकर पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने कहा कि- ‘नीतीश कुमार सेक्युलर थे, हैं और रहेंगे.. लेकिन पार्टी के नेता नहीं है। वो आरक्षण विरोधी हैं। उनका पार्टी पर कोई कंट्रोल नहीं है।’

मुस्लिम नेताओं में नाराजगी, बोले- नीतीश ने भरोसा तोड़ा

मोहम्मद कासिम अंसारी ने CM को लिखे पत्र में कहा, ‘वक्फ बिल पर समर्थन देकर JDU ने अपनी सेक्युलर छवि वाला भरोसा तोड़ा है। लाखों मुसलमानों का यकीन टूटा है। साथ ही लोकसभा में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के दिए भाषण से भी लोग आहत हुए हैं।’वहीं, मोहम्मद शाहनवाज मलिक ने कहा, ‘JDU के समर्थन से लाखों-करोड़ों मुस्लिमों को धक्का लगा है। ललन सिंह के बयान काफी दुख हुआ है। मैं कई साल तक इस पार्टी में रहा। लेकिन अब इस्तीफा दे रहा हूं।’

वक्फ बोर्ड की जमीन छीनने की कोशिश

वहीं, CM नीतीश कुमार के करीबी JDU MLC गुलाम गौस भी इस बिल का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘BJP की सरकार हमेशा मुस्लिमों के खिलाफ ही काम करती है। इस बिल के जरिए वक्फ बोर्ड की जमीन को छीनने की कोशिश की जा रही है। वक्फ के पास जो जमीन है, उससे मुसलमानों की भलाई के लिए कई कार्यक्रम चलाए जाते हैं।’

बिहार में वक्फ की जमीन पर कई आवासीय विद्यालय बनाए गए हैं। जहां छात्र पढ़ते हैं। केंद्र सरकार ने पहले मौलाना आजाद फाउंडेशन का स्कॉलरशिप बंद किया। उसके बाद अल्पसंख्यकों के लिए बजट में कटौती की। मुसलमानों के लिए केंद्र सरकार ने पहले तीन तलाक, घर वापसी जैसे नियम बनाए। सिर्फ मुसलमानों में ही सुधार की जरूरत नहीं है। देश भर में 7 लाख एकड़ वक्फ की भूमि पर केंद्र की नजर है।

JDU बोली- पार्टी से लेना-देना नहीं

JDU की ओर से इन इस्तीफों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा गया है कि मोहम्मद कासिम अंसारी और नवाज मलिक पार्टी के किसी भी आधिकारिक पद पर नहीं हैं। पार्टी ने स्पष्ट किया कि इन दोनों नेताओं का JDU के संगठनात्मक ढांचे से कोई लेना-देना नहीं है।

जदयू के जिला अध्यक्ष मंजू देवी ने कहा है कि डॉ. कासिम अंसारी अब पार्टी के सदस्य नहीं हैं। कासिम अंसारी की एक तस्वीर साझा करते हुए ढाका प्रखंड अध्यक्ष नेहाल ने आरोप लगाया कि वे कांग्रेस नेताओं के साथ दिख रहे हैं। नेहाल ने कासिम अंसारी को जदयू की सदस्यता से जुड़े प्रमाण पेश करने की चुनौती भी दी।

बताया जा रहा है कि जदयू की टिकट पर उन्होंने कभी चुनाव लड़ा ही नहीं। डॉ. कासिम अंसारी ने राजनीति में अपनी पहचान बनाने के लिए पहले AIMIM का दामन थामा था, लेकिन जब वहां से टिकट नहीं मिला तो निर्दलीय चुनाव लड़ा। कासिम की जमानत जब्त हो गई थी।चर्चा ये भी है कि अगर उन्हें पार्टी से इस्तीफा देना था तो जिला अध्यक्ष को सौंपना चाहिए था, लेकिन उन्होंने इसे सीधे मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष को संबोधित कर दिया।
कानूनी लड़ाई लड़ने की चेतावनी

एदारा-ए-शरिया के अध्यक्ष और JDU नेता पूर्व MLC मौलाना गुलाम रसूल बलियावी ने वक्फ बिल पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि-‘अब कम्युनल और सेक्युलर में कोई फर्क नहीं रह गया है। इदारे शरिया देश के सभी हाई कोर्ट में लीगल सेल की बैठक करेगी। इस पर जल्द फैसला लेगी। दीवार पर लिखने से नहीं दिमाग से काम लेना होगा।’

Kunal Gupta

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!