“16वें वित्त आयोग का दौरा:बिहार ने मांगी 1,00,079 करोड़ की विशेष सहायता..
पटना.बिहार को 16वें वित्त आयोग से 1 लाख 59 हजार 311 करोड़ 45 लाख रुपए चाहिए। वित्त आयोग के चेयरमैन अरविंद पनगढ़िया से ऐसी अनुशंसा करने की मांग बिहार सरकार ने की है। इनमें 1,00, 079 करोड़ की विशेष सहायता अलग-अलग सेक्टर की खास योजनाओं के लिए मांगी गई है। शहरी निकायों के लिए 35,025 करोड़ देने का आग्रह किया गया है। पंचायती राज संस्थाओं के लिए भी 24,206 करोड़ देने के लिए 16वें वित्त आयोग से अनुशंसा का अनुरोध बिहार सरकार ने किया है।
संवाद भवन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की मौजूदगी में वित्त सचिव आनंद किशोर ने वित्त आयोग के सामने बिहार की जरूरतों की फेहरिस्त रखी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वित्त आयोग के सदस्यों से कहा कि बिहार को आपसे काफी उम्मीदें हैं। यह गौरव की बात है कि आयोग के अध्यक्ष डॉ अरविंद पनगढ़िया नालंदा विश्वविद्यालय, राजगीर के कुलाधिपति भी हैं।
आयोग ने राज्य के दावे को ऐसे खारिज किया
भारत सरकार के पास अब विशेष राज्य के दर्जे जैसी कोई कैटेगेरी नहीं है।
योजना आयोग के जमाने में विशेष राज्य के दर्जे का प्रावधान हुआ करता था।
विशेष राज्य की मांग नीति आयोग के पास लंबित है। जिसका यह विषय ही नहीं है।
बिहार की मांग, इसलिए चाहिए विशेष दर्जा
कम शहरीकरण और अधिक जनसंख्या घनत्व के कारण बिहार पिछड़ रहा है।
राष्ट्रीय औसत की तुलना में बिहार की प्रति व्यक्ति आय कम हो रही है।
वेतन बोझ बढ़ा है। विशेष सहायता बिना वित्तीय अनुशासन में मुश्किल होगी।
बहुआयामी गरीबी के मापदंड से बिहार को होगा काफी फायदा: अरविंद पनगढ़िया
16वें वित्त आयोग के चेयरमैन अरविंद पनगढ़िया ने कहा कि बहुआयामी गरीबी के मापदंड को वित्त आयोग की रिपोर्ट में शामिल किए जाने से बिहार को काफी फायदा होगा। बिहार ने संसाधनों के बंटवारे में इसे 17.5 फीसदी वेटेज देने की मांग की है। देश की बहुआयामी गरीबी में बिहार की हिस्सेदारी 21.14 फीसदी है। देश के 33.76 फीसदी गरीब बिहार में रहते हैं।
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