“भागवत कथा:धरती पर जब-जब धर्म की हानि होती है, तब-तब प्रभु लेते अवतार
समस्तीपुर। शाहपुर पटोरी जीबी इंटर विद्यालय के सामने दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा आयोजित भागवत कथा के चौथे दिन रविवार को साध्वी आस्था भारती ने कृष्ण जन्म की कथा सुनाई। उन्होंने कहा, जब-जब धर्म की हानि होती है, तब-तब ईश्वर अवतार लेते हैं। श्रीकृष्ण के जन्म से पहले घोर अंधकार था। कारागार के ताले बंद थे। पहरेदार सतर्क थे। बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं था। ठीक इसी तरह, ईश्वर साक्षात्कार के बिना मनुष्य का जीवन भी अंधकारमय है। उसके कर्मों की काल कोठरी से निकलने का कोई उपाय नहीं दिखता।
विषय-विकार रूपी पहरेदार उसे कर्म-बंधन से मुक्त नहीं होने देते। लेकिन जब किसी तत्वदर्शी महापुरुष की कृपा से परमात्मा का प्राकट्य होता है, तो अज्ञान का अंधकार मिट जाता है। विषय-विकार शांत हो जाते हैं। कर्म-बंधन टूट जाते हैं और मुक्ति का मार्ग खुल जाता है। साध्वी ने कहा, आज के इंसान को इसी ज्ञान के प्रकाश की जरूरत है। तभी वह स्वयं के उत्थान के साथ समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को निभा पाएगा। भारतवासियों को गौ माता के संरक्षण और संवर्धन के लिए संकल्प लेना होगा। यदि गौ माता का अस्तित्व समाप्त हुआ, तो हम भी अपने अस्तित्व को नहीं बचा पाएंगे।
कथा के दौरान भगवान कृष्ण के नामकरण प्रसंग का वर्णन हुआ। वासुदेव के बुलावे पर पुरोहित गर्गाचार्य गोकुल पहुंचे। नंद और यशोदा ने उनका स्वागत किया। नंद बाबा ने कहा, हमारे घर दो बालकों ने जन्म लिया है, कृपया उनका नामकरण कर दें। इस पर गर्गाचार्य ने मना कर दिया। उन्होंने कहा, तुम्हें हर काम जोर-शोर से करने की आदत है। कंस को पता चला तो वह मुझे नहीं छोड़ेगा। नंद बाबा ने आग्रह किया कि गौशाला में चुपचाप नामकरण कर दें, किसी को नहीं बताएंगे। गर्गाचार्य मान गए। रोहिणी ने सुना कि कुल पुरोहित आए हैं, तो वह उनके गुणगान करने लगीं।
यशोदा ने मजाक में कहा, अगर गर्गाचार्य इतने बड़े ज्ञानी हैं, तो हम अपने बच्चे बदल लेते हैं। देखते हैं, क्या वे पहचान पाते हैं। माताओं ने परीक्षा लेनी चाही। बच्चे बदलकर गौशाला पहुंच गईं। यशोदा के हाथ में बच्चे को देखकर गर्गाचार्य बोले, यह रोहिणी का पुत्र है, इसलिए इसका एक नाम ‘रौहणेय’ होगा। यह अपने गुणों से सबको आनंदित करेगा, इसलिए इसे ‘राम’ भी कहा जाएगा। बल में इसका कोई समान नहीं होगा, इसलिए एक नाम ‘बल’ होगा। लेकिन सबसे ज्यादा लिया जाने वाला नाम ‘बलराम’ होगा। इस दौरान कहा कि देश प्रेम से बढ़कर कोई प्रेम नहीं होता, यह एक ऐसी भावना है जो हमें अपने देश के प्रति समर्पित करती है और उसकी उन्नति के लिए कार्य करने की प्रेरणा देती है। आज का दिन देश के वीर सपूत शहीदे आजम भगत सिंह, सुखदेव एवं राजगुरु हंसते हंसते फांसी पर झुल गए।
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