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“TRE-3 में 50% आरक्षण पर ही होगी बहाली, 7 दिनों में मांगा रिजर्वेशन रोस्टर क्लीयरेंस

बिहार में तीसरे चरण की शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में 65 फीसदी आरक्षण लागू नहीं होगा। बीसी, ईबीसी और एससी-एसटी को बढ़े हुए आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। शिक्षा विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इसे स्पष्ट किया है।

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50 प्रतिशत आरक्षण के आधार पर ही नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस संबंध में गुरुवार को प्राथमिक शिक्षा निदेशक मिथिलेश मिश्र ने सभी जिलों के डीईओ को पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है कि तीसरे चरण में पास अभ्यर्थियों की नियुक्ति में 50 प्रतिशत आरक्षण रोस्टर का पालन किया जाएगा।

प्राथमिक निदेशक ने डीईओ से 1 से 8वीं तक रिक्त रोस्टर क्लीयरेंस मांगा है। डीईओ को इसे 7 दिनों में शिक्षा विभाग को उपलब्ध करना है। आदेश में कहा गया है कि रोस्टर क्लीयरेंस रिपोर्ट हार्ड और सॉफ्ट कॉपी में होगी। सभी डीईओ को रोस्टर क्लीयरेंस रिपोर्ट को लेकर एक फॉर्मेट भी भेजा गया है।

पटना हाईकोर्ट ने 20 जून को दिया था फैसला

पटना हाईकोर्ट ने 20 जून को बिहार सरकार के आरक्षण सीमा बढ़ाए जाने के फैसले को खारिज कर दिया था। राज्य सरकार ने शिक्षण संस्थानों और सरकारी नौकरियों में SC-ST, OBC और EBC को 50 फीसदी से बढ़ाकर 65 फीसदी आरक्षण देने का फैसला लिया था। इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।

अब जानिए हाईकोर्ट ने क्यों रद्द किया फैसला

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि रिजर्वेशन इन कैटेगरी की आबादी की बजाय इनके सामाजिक और शिक्षा में पिछड़ेपन पर आधारित होना चाहिए। बिहार सरकार का फैसला संविधान के अनुच्छेद 16(1) और अनुच्छेद 15(1) का उल्लंघन है।अनुच्छेद 16(1) राज्य के तहत किसी भी कार्यालय में रोजगार या नियुक्ति से संबंधित मामलों में सभी नागरिकों के लिए समानता का अवसर प्रदान करता है। अनुच्छेद 15(1) किसी भी प्रकार के भेदभाव पर रोक लगाता है।

आरक्षण का दायरा 75 फीसदी हुआ था

जातीय गणना की सर्वे रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद सरकार ने आरक्षण का दायरा बढ़ाकर OBC, EBC, दलित और आदिवासियों का आरक्षण 65 फीसदी कर दिया था। इसमें आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को बिहार में सरकारी नौकरियों और उच्च शैक्षणिक संस्थानों में मिलने वाले 10 प्रतिशत आरक्षण को मिलाकर कोटा को बढ़ाकर 75 प्रतिशत तक कर दिया गया था।

बिहार सरकार ने जातीय गणना की रिपोर्ट 2 अक्टूबर को जारी की थी। इसके मुताबिक बिहार में सबसे ज्यादा आबादी पिछड़ा वर्ग और अत्यंत पिछड़ा वर्ग की है। रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में 27.12% पिछड़ा वर्ग और 36% आबादी अत्यंत पिछड़ा वर्ग की है। दोनों को जोड़ दें तो इनकी संख्या 63% हो गई है।

Kunal Gupta

9 साल का पत्रकारिता का अनुभव।प्रभात खबर में कार्यरत, साथ ही बिहार न्यूज tv, आज अख़बार, दैनिक भास्कर में कार्य का अनुभव।कंटेट राइटर, एडिटिंग का कार्य,पत्रकारिता की हर विधा को सीखने की लगन।

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