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मध्य विद्यालय दलसिंहसराय की प्रधानाध्यापिका ने बदली विद्यालय की तस्वीर,विद्यालय मना रहा 125 वीं वर्षगांठ

दलसिंहसराय। कुणाल गुप्ता।कहते है,मन में कुछ करने का जज्बा और जुनून हो तो कुछ भी असंभव नहीं है.ऐसा ही कर दिखाया है मध्य विद्यालय दलसिंहसराय कि प्रधानाध्यापिका कुमारी विभा ने.यु तो विद्यालय पुरे अनुमंडल क्षेत्र में सबसे खास है क्योंकि विद्यालय इसी साल अपनी 125 वीं वर्षगांठ मनाने जा रहा है.उससे भी खास है विद्यालय कि बदली हुई तस्वीरें जो सभी बड़े अधिकारियो को अपनी ओर खींच लेती है.सरकारी मदद व अपनी सैलरी से प्रधानाध्यापिका ने स्कूल की तस्वीर और तकदीर दोनों ही बदल दी है,मेहनत और लगन का ईनाम भी उन्हें व विद्यालय को मिला.राज्य से लेकर जिला एंव अनुमंडल से उनके विद्यालय को सम्मानित भी किया गया है.शिक्षण, संस्कार,पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए काम दूसरे स्कूलों के लिए नजीर बन चुका है.स्कूल कैंपस को फलदार और फूलों वाले पौधों से इको फ्रेंडली बनाया गया है.बच्चों को गर्मी न लगे इसके लिए कमरों में पंखे लगाए गए हैं.विद्यालय में प्रवेश करते ही लगता ही नहीं कि हम किसी सरकारी स्कूल में आ गए हैं.विद्यालय का अनुशासन और रखरखाव किसी कॉन्वेंट स्कूल से कम नहीं है.

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बच्चो को अच्छी शिक्षा संग मिलती हैं संस्कार

विद्यालय में बच्चों को पढ़ाई में अच्छे और कमजोर बच्चों को विभाजित कर अतिरिक्त कक्षा लगाई जाती है.जिसका फल है कि प्रखंड स्तर पर कई पुरस्कार बच्चों को मिल चुका है.2021 से लगातार यहां के बच्चे अनुमंडल से लेकर जिला व राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में अव्वल आ रहे हैं.यही नहीं बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के साथ ही संस्कार भी सिखाया जाता है.विद्यालय से बच्चे के लगातार दो दिन गायब रहने पर उसके माता-पिता से संपर्क किया जाता है.वही विद्यालय में पर्यावरण को लेकर भी समय समय पर कार्यक्रम कर बच्चो को जागरूक किया जाता है.विद्यालय में क्यारियां बनाकर पर्यावरण का संदेश दिया जा रहा है.मौसम के अनुरूप इसमें पौधे लगाए जाते हैं.साफ सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है.समय-समय पर क्यारी में नए फूल के पौधे लगाए जाते हैं.

स्मार्ट क्लास,कम्प्यूटर की भी सुविधा

मध्य विद्यालय दलसिंहसराय में बच्चों को आधुनिक शिक्षा देने के लिए केवल कंप्यूटर लैब ही नहीं है बल्कि स्मार्ट क्लास व स्मार्ट टीवी जैसी सुविधाएं भी हैं. स्कूल में स्मार्ट क्लास की मदद से बच्चे तमाम चीजे आसानी से समझते हैं.कम्प्यूटर पर बच्चे चित्रकारी,प्रिंट,कम्प्यूटर ज्ञान हासिल कर रहे है.वही लाइब्रेरी में बच्चो को पढ़ने की ज्ञानवर्धक व विद्यालय से संबंधित सभी पुस्तक उपलब्ध है जिन्हे बच्चे बैठ कर पढ़ते है.स्कूल में हर तरफ फैली हरियाली,दीवारों पर महापुरुषों के संदेश व उनके फोटो के साथ ही साफ सुथरा भवन सभी को आकर्षित करता है.

माता पिता से मिली कुछ अलग करने की प्रेरणा

विद्यालय की प्रधानाध्यापिका कुमारी विभा बताती है कि उनके माता पिता से कुछ अलग करने की प्रेरणा मिली.बचपन से ही माता -पिता को बच्चों का भविष्य संवारते देखा.उनकी प्रेरणा से ही कुछ अतिरिक्त प्रयास करना शुरू किया.मैंने सोचा था कि इस सरकारी स्कूल को ऐसा बनाऊं की यह गरीबों को प्राइवेट स्कूल लगे.बच्चे यहां आकर अपने पेरेंट्स को यह नहीं कोसे की पैसे के अभाव में प्राइवेट स्कूल में नहीं पढ़ाया.वो बताती है कि जब वह स्कूल में आई थी तब इस विद्यालय की काफी दयनीय हालत थी.खपड़े वाली रूम में बच्चे पढ़ते थे.छात्रछात्रा भी बेहद कम आती थी.परन्तु मैं इस हालत को बदलने की ठानी और शुरू में बिना सरकारी मदद के विद्यालय में कई काम कराया. काफी प्रयास के बाद कुछ मदद मिली फिर भी खुद व छात्रों के सहयोग से विद्यालय में क्यारियां बनाकर पर्यावरण का संदेश, साफ सफाई की व्यवस्था,क्यारी में नए फूल के पौधे लगाना,शौचालय, पढ़ाई, खेल जैसी व्यवस्था को बेहतर तरिके से संचालित किया जिसका नतीजा है आज विद्यालय का अपना भवन है,शिक्षकों की मेहनत और प्रयास से अब छात्रों की संख्या 1 हजार से ऊपर है.जो रोजाना आरहे है.स्कूल के बेहतर माहौल से बच्चों की शत प्रतिशत उपस्थिति रहती है.

विद्यालय को मिल चूका है कई पुरुस्कार।

मध्य विद्यालय दलसिंहसराय कि प्रधानाध्यापिका कुमारी विभा के बदौलत बर्ष 2023 में विद्यालय को बिहार स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार के तहत स्वच्छ् विद्यालय सह सामुदायिक सहभागिता श्रेणी में पुरस्कार,जिला से शिक्षा में उत्कृष्ट कार्य के लिए एंव संचालन के लिए पुरुस्कार,अनुमंडल में रंगोली में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए पुरस्कार,विद्यालय में जैविक खेती को लेकर पोषण वाटिका को लेकर रिजेनेरेटिव बिहार द्वारा,बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ को लेकर जिला प्रशासन सहित पीछले कई वर्षो में दर्जनों पुरुस्कार व टॉफी मिल चुकी है जो विद्यालय की शान में चार चाँद लगा रही है.

शिक्षको की कमी के बाबजूद बेहतर शिक्षा व्यवस्था।

विद्यालय कि कुमारी विभा बताती है कि पहले 11 शिक्षक थे.जिसके सरकार के गाइडलांस शाम 5 बजे तक पढ़ाने वाली बात से एक शिक्षक रिजाइन देकर चले गए.एक का अभी बीपीएससी +12 में चयन हो जाने के कारण अब यह भी चली जाएगी तो 9 बची है.कुल 11 वर्ग है.कम शिक्षक कि वजह से शिक्षा बाधित ना हो इसे लेकर खास रूटिंग बना कर सभी पढ़ा रहे है.कमी के बाबजूद भी हर साल खेलकूद या पढ़ाई सभी क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करते है विद्यालय के छात्रछात्र.1 से 8 वीं तक के विद्यालय में अभी कुल 1013 छात्र पहुँच रहे है.वही मिशन दश के तहत 105 छात्र का चयन 6,7,8 वर्ग से किया गया है.जिसे रोजाना पढ़ाया जाता है.

बाल सांसद,आइसीटी लैब,यूथ क्लब,युको क्लब की व्यवस्था।

दलसिंहसराय शहर के थाना रोड में स्थित इस विद्यालय में बाल सांसद है जिसके संचालक रंजीत कुमार चौधरी कर रहे है,जिसमें बच्चो द्वारा प्रधानमंत्री व उपप्रधानमंत्री छात्रों को बना कर विद्यालय की गतिविधि पर नजर रखी जाती है.पिने का पानी की साल में दो बार जाँच की जाती है,विद्यालय में ही आरओ की व्यवस्था है.आइसीटी लैब में शिक्षक शुभम कुमार की देख रेख में रोजाना 30 छात्र कम्प्यूटर सीखते है.स्मार्ट कक्ष,पुस्तकालय कक्ष में शिक्षिका कुमारी सिमथी की देखरेख में बच्चे सीखते है.यूथ क्लब,युको क्लब की नोडल शिक्षिका अनीति है. विद्यालय में हर गतिविधियों पर नजर रखने के लिए 4 सीसीटीवी लगा हुआ है, रसोई घर,12 शौचालय है जिसमें लड़का -लड़की के लिए अलग अलग व्यवस्था है.बैठने के लिए बैच डेस्क है,हाथ धोने के लिए बेसिन,सभी रूम में पंखो की व्यवस्था.फस्ट किट की व्यवस्था,मेडिसिन की व्यवस्था है,खेल की सामग्री उपलब्ध है.बच्चे खुद से अपना नाम लिख कर हाजिरी बनाते है जो बेहद खास है.

125 वां वर्षगांठ मना रहा विद्यालय।

कुमारी विभा बताती है कि अनुमंडल क्षेत्र में कई विद्यालय बने परन्तु इस विद्यालय का इतिहास आजादी से भी एक दशक पहले कि है.1899 में विद्यालय की स्थापना हुई थी.उस समय क्षेत्र के कई क्रन्तिकारी इस विद्यालय में पढ़ते थे.वही आजादी के बाद विद्यालय के कई छात्र पढ़ कर अच्छे अच्छे पोस्ट पर कार्यरत है.सभी के प्रयास से इस साल विद्यालय का 125 वां वर्षगाठ धूमधाम से मनाने कि बात चल रही है.

Kunal Gupta

9 साल का पत्रकारिता का अनुभव।प्रभात खबर में कार्यरत, साथ ही बिहार न्यूज tv, आज अख़बार, दैनिक भास्कर में कार्य का अनुभव।कंटेट राइटर, एडिटिंग का कार्य,पत्रकारिता की हर विधा को सीखने की लगन।

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