Samastipur

समस्तीपुर:उमस भरी गर्मी से लोग परेशान,बारिश नहीं होने से किसानों की बढ़ी परेशानी:इस महीने में मात्र 63 एमएम हुई बारिश

समस्तीपुर.यहां खेतों में दरार दिख रहे हैं। बारिश नहीं होने से किसान हताश हैं। जुलाई महीने में अब तक 63 एमएम बारिश हुई है। आज से दस वर्ष पूर्व वर्ष 2013 में 45 एमएम बारिश जुलाई महीने में हुई थी, जिसके बाद जिले को सूखाग्रस्त घोषित किया गया था। इस बार भी वैसी ही स्थिति बनती जा रही है। बारिश नहीं होने के कारण जिले में 30-35 फीसदी भी धान की रोपनी नहीं हो पाई है। कुछ लोग पंप सेट के सहारे धान की रोपनी करने में लगे हैं।

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15 हजार हेक्टेयर में ही हुई है रोपनी

कृषि विभाग के सरकारी आंकड़े के अनुसार जिले में 79 हजार 719 .34 हेक्टेयर में धान की रोपनी का लक्ष्य रखा गया है] लेकिन अबतक 15 हजार हेक्टेयर के करीब ही धान की रोपनी हो पाई है। 15 अगस्त के बाद धान रोपने वाले किसान को लाभ नहीं मिल पाएगा। चुकी जिले में नलकूप की स्थिति भी ठीक नहीं है। जिले भर के 346 पंचायतो में 377 नलकूप हैं, जिनमें से 186 ठीक है। 191 नलकूप खराब हैं। ऐसी स्थिति में नलकूप के सहारे भी खेती नहीं की जा सकती।

मानसून की बेरूखी के कारण बढ़ी परेशानी

किसानों का कहना है कि समस्तीपुर जिले में वर्षा आधारित खेती होती है। ऐसी स्थिति में खेतों में बड़ी-बड़ी दरार पड़ गई है, जिन किसानों ने बिड़चा गिराया था। वह भी वर्षा के अभाव खराब होने वाला है। खेतो में बड़ी-बड़ी दरार पड़ गई है। बताया गया है कि जिले में औसतन जुलाई महीने में 170 एमएम ही बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन अबतक मात्र 63 एमएम बारिश रिकार्ड की गई है, जिससे खेती संभव नहीं है।

पंप सेट से पटबन कर धान की रोपनी कर रहे किसान
पंप से पानी पटा कर रहे हैं बुआई

मोहिउद्दीननगर के किसान विकास कुमार व चंदन का कहना है कि जिले में न ही नलकूप ठीक हैं और नहीं बारिश हो रही है। ऐसी स्थिति में धान की रोपनी होना संभव दिखाई नहीं पड़ रहा है। कुछ किसान पंप सेट से पानी पटा कर खेती कर रहे हैं, लेकिन लगातार पंप से पानी पटाना भी संभव नही है। प्रति कठ्‌ठा करीब डेढ़ हजार का खर्च बढ गया है।

पंप सेट से पानी पटा रहे किसान
वर्षा की स्थिति
2023 में 63 एमएम
2022 में 205 एमएम
2021 में 255 एमएम
2020 में 646एमएम
2019 में 357 एमएम
2018 में 170 एमएम
2017: 442 एमएम
2016: 304 एमएम
2015: 149 एमएम
2014 : 339 एमएम
2013: 45 एमएम

जिले में गरमा फसल का लक्ष्य

धान: 797190 हेक्टेयर में धान रोपने का लक्ष्य मक्का: 29165 अरहर: 2468 उड़द: 769 मुंग दाल: 1630

क्या बोले कृषि वैज्ञानिक

डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालस मौसम विभाग के वैज्ञानिक डॉ गुलाब सिंह ने बताया कि मानसून की बेरुखी के कारण किसानों को परेशानी हो रही है। जिले में मानसून कमजोर हो गया है। बारिश की अभी कम ही उम्मीद है। किसान वर्षा नहीं होने की स्थिति में मूंग व तील की खेती कर सकते हैं।

Kunal Gupta

9 साल का पत्रकारिता का अनुभव।प्रभात खबर में कार्यरत, साथ ही बिहार न्यूज tv, आज अख़बार, दैनिक भास्कर में कार्य का अनुभव।कंटेट राइटर, एडिटिंग का कार्य,पत्रकारिता की हर विधा को सीखने की लगन।

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