Indian RailwaysPatna

Bihar Train Accident;42 साल पहले का वो काला दिन, जब उफनती नदी में समा गए थे ट्रेन के 9 डिब्बे, 800 लोगों की चली गई थी जान

Bihar Train Accident: ओडिशा के बालासोर में शुक्रवार की शाम को भीषण ट्रेन हादसा हुआ, जहां बहनागा स्टेशन के पास कोरोमंडल एक्सप्रेस और मालगाड़ी आपस में टकरा गईं. हादसे में अब तक 237 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि, सैकड़ों लोग बुरी तरह घायल हैं. लेकिन देश का यह कोई पहला बड़ा रेल हादसा नहीं है. भारत में इससे पहले भी कई भीषण रेल हादसे हो चुके हैं. आज हम बात करेंगे 42 साल पहले हुए बिहार रेल हादसे (Bihar Train Accident) की, जिसे देश का सबसे बड़ा रेल हादसा माना जाता है.

Dss WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
bihar whatsapp Channel Join Now

 

 

दिन था 6 जून 1981 का. यात्रियों से खचाखच भरी एक ट्रेन मानसी-सहरसा रेल खंड पर बदला घाट-धमारा घाट स्टेशन के बीच बागमती नदी पर बने पुल संख्या-51 पर पलट गई थी. इस ट्रेन में कुल 9 बोगियां थीं.

 

ट्रेन की 9 बोगियां उफनती बागमती में जा गिरीं थी. यह ट्रेन मानसी से सहरसा को जा रही थी. इस हादसे में 800 लोगों की मौत हो गई थी. जानकारी के मुताबिक, 6 जून 1981 को मानसी तक ट्रेन सही सलामत बढ़ रही थी. शाम तीन बजे ट्रेन, बदला घाट पहुंची. थोड़ी देर रुकने के बाद ट्रेन धीरे-धीरे धमारा घाट की ओर चली.

 

 

 

ट्रेन ने कुछ ही दूरी तय की थी कि मौसम खराब हो गया. तेज आंधी के बाद बारिश भी होने लगी. तब तक ट्रेन रेल के पुल संख्या 51 के पास पहुंच गई थी. ट्रेन अपनी रफ्तार से दौड़ रही थी कि तभी अचानक ट्रेन के ड्राइवर ने ब्रेक लगा दी, जिसके बाद पैसेंजर ट्रेन की 9 बोगियां पुल से बागमती नदी में जा गिरीं.

 

 

 

कई लोगों के शव कई दिनों तक ट्रेन की बोगियों में ही फंसे रहे थे. इस हादसे में मरने वालों की सरकारी आंकड़े के अनुसार संख्या 300 थी. लेकिन, स्थानीय लोगों के अनुसार हादसे में 800 के करीब लोग मारे गए थे. इस हादसे को देश के सबके बड़े रेल हादसे के रूप में याद किया जाता है.

 

हादसे के पीछे कई थ्योरियां

इस हादसे के पीछे कई थ्योरियां सामने आईं थी. कहा जाता है कि जब ट्रेन बागमती नदी को पार कर रही थी तभी ट्रैक पर गाय और भैंसों का झुंड सामने आ गया था, जिसे बचाने के चक्कर में ड्राइवर ने ब्रेक मारी थी.

 

वहीं, यह भी कहा जाता है कि उस समय बारिश तेज थी, आंधी भी थी, जिसके कारण लोगों ने ट्रेन की सभी खिड़कियों को बंद कर दिया था और तेज तूफान होने की वजह से पूरा दबाव ट्रेन पर पड़ा और बोगियां नदी में समा गईं. हालांकि, ड्राइवर ने ब्रेक क्यों लगाई थी, इसका खुलासा आज तक नहीं हो पाया है.

Kunal Gupta

9 साल का पत्रकारिता का अनुभव।प्रभात खबर में कार्यरत, साथ ही बिहार न्यूज tv, आज अख़बार, दैनिक भास्कर में कार्य का अनुभव।कंटेट राइटर, एडिटिंग का कार्य,पत्रकारिता की हर विधा को सीखने की लगन।

error: Content is protected !!