Patna

समय पर इलाज होने से गंभीर बीमारी का भी इलाज संभव: डॉ.शालिग्राम

बक्सर, 30 मार्च | गंभीर बीमारियों को नजर अंदाज करना मरीजों के लिए काफी नुकसान देह साबित हो सकता है। यदि उसका समय पर इलाज शुरू किया जाए तो गंभीर से गंभीर बीमारी का भी इलाज संभव है। ऐसी ही एक गंभीर बीमारी है कुष्ठ। जिसे पूर्व में लोग अभिशाप मानते थे । जिसके मरीज शारीरिक एवं मानसिक रूप से अपने आप को कमजोर मानने लगते हैं। लेकिन लोगों को यह समझना होगा कि दिव्यांगता केवल जन्म के समय नहीं होती है। कई ऐसी बीमारियां भी हैं, जिनको नजरअंदाज करने से मरीज दिव्यांग भी हो सकता है। इस क्रम में गत दिनों राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के तहत सदर प्रखंड के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अंतर्गत शहरी क्षेत्र के किला मैदान, पांडेय पट्टी व मलह चकिया स्थित स्लम बस्तियों में कुष्ठ रोगियों के परिजनों को सिंगल डोज रिफैम्पिसिन खिलायी गई। अभियान के दौरान डॉ सौरभ राय, पारा मेडिकल वर्कर नागेश दत्त पांडेय, आशा अंजली सिंह व मालती कुमारी के द्वारा मरीज के परिजनों को दवा खिलायी गई।

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हवा में मौजूद बैक्टीरिया के जरिए फैलता है कुष्ठ:
जिला कुष्ठ निवारण पदाधिकारी डॉ. शालिग्राम पांडेय ने बताया कि पूरे जिले में सघन अभियान चलाकर दवा खिलाई गई। ताकि कुष्ठ पर नियंत्रण किया जा सके। इस कार्यक्रम के तहत मरीजों के संपर्क में रहने वाले लोगों को दवा दी जाती है। उन्होंने बताया कि कुष्ठ एक ऐसी बीमारी है जो हवा में मौजूद बैक्टीरिया के जरिए फैलती है। हवा में ये बैक्टीरिया किसी बीमार व्यक्ति से ही आते हैं। इसलिए इसे संक्रामक रोग भी कहते हैं। यानी यह संक्रमण या कहिए कि सांस के जरिए फैलती है। लेकिन यह छुआछूत की बीमारी बिल्कुल नहीं है। अगर आप इस बीमारी से ग्रसित व्यक्ति से हाथ मिलाएंगे या उसे छू लेंगे तो आपको यह बीमारी बिल्कुल नहीं होगी। लेकिन अगर उसके खांसने, छींकने से लेप्रै बैक्टीरिया हवा में डेवलप कर लेता और आप उस हवा में सांस लेकर नमी के उन कणों को अपने अंदर ले लेते हैं तो संभावनाएं बन सकती हैं कि आप इस बीमारी से संक्रमित हो जाएं।
कुष्ठ बीमारी का पूर्ण इलाज सम्भव :
डॉ. शालिग्राम पांडेय ने बताया, कुष्ठ की पहचान बिल्कुल आसानी से हो सकती है। चमड़े पर किसी तरह का दाग या धब्बा जिसमें दर्द या खुजली नहीं होती हो और यह निशान जन्म से ही नहीं हो तो यह कुष्ठ रोग का प्रारंभिक लक्षण हो सकता है। उन्होंने बताया, कुष्ठ बीमारी का पूर्ण इलाज सम्भव है। समय से इलाज कराने से यह रोग पूरी तरह ठीक हो सकता है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा इसके इलाज के लिए एमडीटी (मल्टी ड्रग थेरेपी) का उपयोग किया जाता है। एमडीटी की पूरी खुराक नियमानुसार सेवन करने के बाद कोई भी कुष्ठ प्रभावित व्यक्ति सामान्य इंसान जैसा हो सकता है। उन्होंने बताया कि कुष्ठ रोगियों को सरकार की ओर से आठ हजार रुपये सहायता राशि भी दी जाएगी। वहीं, जो मरीज कुष्ठ की वजह से कोई भी काम करने में सक्षम नहीं हैं, प्रशासनिक स्तर पर उन्हें 1500 रुपये प्रतिमाह पेंशन भी दिया जाता है।

Kunal Gupta

9 साल का पत्रकारिता का अनुभव।प्रभात खबर में कार्यरत, साथ ही बिहार न्यूज tv, आज अख़बार, दैनिक भास्कर में कार्य का अनुभव।कंटेट राइटर, एडिटिंग का कार्य,पत्रकारिता की हर विधा को सीखने की लगन।

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