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समस्तीपुर;मनमानी… देना है 2 किलो गेहूं और 3 किलो चावल दिया जा रहा है 4 किलो चावल और 1 किलाे गेहूं

 

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.|समस्तीपुर | गरीबों के लिए चलाई जा रही खाद्य सुरक्षा योजना जिले में मजाक साबित हो रही है। योजना के तहत गरीब एवं वंचित तबके को 2 रुपए किलो गेहूं व 3 रुपए किलो चावल देने का प्रावधान है। कोरोना काल के समय से सरकार 5 किलो मुफ्त अनाज प्रति व्यक्ति दे रही थी। अब यह फ्री कोरोना काल का फ्री अनाज जनवरी 2023 से बंद कर दिया गया। अब खाद्य सुरक्षा योजना के तहत मिलने वाली 2 किलो गेहूं व 3 किलो चावल को फ्री कर दिया गया है, जिसमें 4 किलो चावल और एक गेहूं शामिल है। लेकिन इस योजना के तहत जिन लोगों को लाभ मिल रहा है उनमें कई लोग इसके पात्र नहीं हैं। जो पात्र हैं उनका नाम लाभार्थियों की सूची से गायब है। भास्कर पड़ताल में सामने आया कि बड़े-बड़े व्यवसायी, केन्द्रीय पेंशन भोगी, बड़े-बड़े मकान में रहने वाले लोग सहित आदि लोग इसका लाभ उठा रहे हैं। जब डीलरों से नामाें के बारे पूछा गया तो उनका जवाब यह था कि गड़बड़ियां तो बहुत है। विभाग द्वारा ही हमलोगों को कार्डधारियों को राशन देने के लिए कहा गया है। राशन मुहैया कराने में कुछ भी होता है तो सिर्फ डीलरों को ही दंड भुगतना होता है। जिले में 8 लाख 67 हजार कार्डधारी हैं।

जांच कराई जाए तो बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां उजागर होंगी

रिपाेर्टर ने जब शहर के वार्ड-24 में लाेगाें से बात कि ताे सच्चाई सामने आई। मो. अकबर, नूरजहां, अब्दुल सुभान, मो. इशरार अहमद आदि इस तरह कई लोग जो मजदूरी कर झाेपड़ी में जीवन बसर कर रहे हैं इन लोगों का नाम राशन की सूची से काट दिया गया है। बड़ी संख्या में लोग अपना दर्द बयां करते नजर आए कि मुझे मुफ्त या 2 और 3 रुपए का अनाज नहीं दिया जाता है। पूरे जिले में इसकी जांच कराई जाए तो बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां उजागर होगी। इसमें गलत लोगों को अनाज वर्ष 2014 से ही मुहैया कराया जा रहा है।

गलत का नाम पता नहीं चलता

खाद्य सुरक्षा योजना में परिवार के मुखिया में महिला का नाम से कार्ड होता है और महिला के पति नहीं बल्कि पिता का नाम दर्ज होगा। इसमें सबसे बड़ी बात है कि महिला का मायके कहीं और होता है और ससुराल में निवासी के नाम कार्ड बनता है। ऐसे में कौन महिला किसकी पत्नी है यह पता कर पाना काफी मुश्किल है।

किन लोगों को नहीं देना है लाभ

किसी के पास तीन कमरे का पक्का मकान, दो, तीन पहिए और चार पहिए वाहन, घर का कोई सदस्य 10 हजार रुपए से ज्यादा आमदनी करता हो, सरकारी कर्मी या पेंशनभोगी बिहार सरकार या केन्द्र सरकार, इनकम टैक्स रिटर्न भरने वाले को इसका लाभ नहीं देना है। कूड़ा चुनने वाला, घरेलू श्रमिक, फुटपाथी दुकानदार, मोची, फेरीवाले काे लाभ मिलना है।

^इसमें कई लोगों का नाम कटा है। अभी तक करीब 1 लाख 25 हजार लोगों का कार्ड को रद्द किया गया है जिनकी मृत्यु हो चुकी थी इत्यादि का। पिछले वर्ष 2022 में लगभग 22 हजार कार्डधारियों का नाम कटा है जो इसके पात्र नहीं है। और अभी भी जांच कर नामों को काटने की प्रक्रिया जारी है। कई गलत लोगों काे नोटिस कर नाम हटाया गया है। और जो इसके पात्र हैं जिन्हें नहीं मिल रहा वे विभाग से संपर्क कर अपना कार्ड बनवा सकते हैं। -महमूद आलम, जिला आपूर्ति पदाधिकारी, समस्तीपुर.
सोर्स:लक्ष्मीकांत सिंह,भास्कर।

Kunal Gupta

9 साल का पत्रकारिता का अनुभव।प्रभात खबर में कार्यरत, साथ ही बिहार न्यूज tv, आज अख़बार, दैनिक भास्कर में कार्य का अनुभव।कंटेट राइटर, एडिटिंग का कार्य,पत्रकारिता की हर विधा को सीखने की लगन।

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