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विक्रमशिला सेतु पर जानलेवा गड्डे, रेलिंग खतरनाक, केंद्र सरकार ने लौटाई फाइल; कौन कराएगा मेंटेनेंस?

पटना।
विक्रमशिला सेतु के मेंटेनेंस से केंद्र सरकार ने फिलहाल किनारा कर लिया है। केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (मोर्थ) ने भागलपुर स्थित राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल को 23 करोड़ के प्रस्ताव वाली फाइल लौटा दी है। मोर्थ ने फाइल वापसी पर टिप्पणी की है कि विक्रमशिला सेतु के 100 मीटर के दायरे में समानांतर पुल का निर्माण केंद्र सरकार करा रहा है। ऐसे में जब तक यह पुल पूरी तरह तैयार न हो जाए, तब तक विक्रमशिला सेतु का मेंटेनेंस राज्य सरकार अपने मद से कराए। जैसा अब तक होता आया है।

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इधर, मोर्थ की आपत्ति के बाद बिहार सरकार ने भी केंद्र सरकार को जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाया है। पथ निर्माण विभाग (आरसीडी) ने विक्रमशिला सेतु के कायाकल्प को लेकर 23.25 करोड़ देने में असमर्थता जताते हुए कहा कि जब तक पुल निर्माण निगम या उनके पास इसका जिम्मा था, राशि दी जाती रही है। अब चूंकि केंद्र सरकार ने इस सेतु को राष्ट्रीय उच्च पथ (एनएच-133 ई) घोषित कर दिया है। तब नियमानुसार यह पुल केंद्र सरकार के अधीन हो जाता है। ऐसे में मेंटेनेंस कराने की जिम्मेदारी मोर्थ की है।

इंजीनियर इन चीफ करेंगे अपर मुख्य सचिव से बात, तभी निदान संभव
मेंटेनेंस को लेकर राज्य और केंद्र सरकार की जिच में फंसी सेतु की फाइल फिर से दौड़ाने की कवायद हो रही है। इसके लिए अधीक्षण अभियंता अनिल कुमार सिंह ने पहल की है। अधीक्षण अभियंता ने विभाग के इंजीनियर इन चीफ (अभियंता प्रमुख) हनुमान प्रसाद चौधरी को सेतु की स्थिति और उसकी उपयोगिता की जानकारी दी है। उनसे अनुरोध किया गया है कि वे आरसीडी के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत से मिलकर सेतु की स्थिति को बताएं। साथ ही मोर्थ से राशि आवंटन कराने की कोशिश करें। बताया गया कि 23.25 करोड़ के अलावा स्ट्रीट लाइट के इंस्टॉलेशन, रखरखाव और बिजली बिल के रूप में सालाना 72 लाख रुपये की संभावित खर्च का प्रस्ताव में जिक्र किया गया था।

यह है सेतु का सूरत-ए-हाल
पूरे सेतु पर 86 ज्वाइंट्स हैं। जो दो पिलर के बीच में हैं। इनमें 68 के समीप गड्ढे हैं। 23 गड्डे तो जानलेवा हैं। गड्ढे की साइज परिधि में ढाई फीट चौड़ी है। इसमें फंस कर गाड़ियां स्किट करती हैं। बालू ले जाने वाले ट्रक का गुल्ला यहीं टूटता है। लोड ट्रक एक फीट तक उछल जाता है। इससे पुल के धंसने का खतरा है। 64 ढक्कन में 31 क्षतिग्रस्त हैं। ढक्कन के अंदर का छड़ दिखने लगा है। साइडवॉल टूट गया है। दोनों साइड में 17 जगहों पर यह टूटी हुई है। पीलर संख्या 47 से 49 तक टूटी रेलिंग खतरनाक है।

क्या कहते हैं इंजीनियर?

मोर्थ से फाइल लौटने के बाद सारी स्थिति से अभियंता प्रमुख को अवगत कराया गया है। भागलपुर जीरोमाइल से नवगछिया जीरोमाइल तक करीब 10 किमी सड़क सह पुल का मेंटेनेंस जरूरी है। मेंटेनेंस के अभाव में सेतु की सड़क क्षतिग्रस्त हो गई है। इसे ठीक कराना जरूरी है। – अनिल कुमार सिंह, अधीक्षण अभियंता, एनएच।

Kunal Gupta

9 साल का पत्रकारिता का अनुभव।प्रभात खबर में कार्यरत, साथ ही बिहार न्यूज tv, आज अख़बार, दैनिक भास्कर में कार्य का अनुभव।कंटेट राइटर, एडिटिंग का कार्य,पत्रकारिता की हर विधा को सीखने की लगन।

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