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फल विक्रेता ने संतरा बेचना छोड़ शुरू कर दी सर्जरी…बिहार के डाक्टर को हुए ज्ञान की हैरान करने वाली कहानी

मुजफ्फरपुर।इस खबर को एक सवाल के साथ शुरू कर रहा हूं। कोई फल विक्रेता बहुत अधिक तरक्की कर ले तो क्या बन सकता है? आपका जवाब होगा कि यदि वह वेंडर है तो थोक विक्रेता बन सकता है। इससे अधिक सोचा भी नहीं जा सकता है। यदि मैं कहूं कि एक फल विक्रेता सर्जन बन जाए तो शायद सामने से आप कहें कि दिमाग खराब हो गया है क्या, किंतु सच्चाई यही है। बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित सकरा में एक फल विक्रेता झोला छाप डाक्टर के संपर्क में आया। इन दोनों की दोस्ती से एक फल विक्रेता झोला छाप सर्जन बन गया। एक महिला की दोनों किडनी चोरी करने में उसका नाम आया है।

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अधिक पैसा कमाने की चाहत

भूटान एवं दिल्ली में रहकर संतरे का व्यवसाय करने वाले पवन ने सपने में भी नहीं सोचा था कि उसके नाम के आगे ‘डाक्टर’ लिखा जाएगा, लेकिन यह कर दिखाया वैशाली के पातेपुर थाना क्षेत्र के नउवा चक निवासी एक फर्जी चिकित्सक आरके सिंह ने। आरके सिंह बरियारपुर में निजी प्रैक्टिस करने के लिए चार वर्ष पहले आया था। कुछ दिनों तक प्रैक्टिस की, लेकिन दुकान नहीं चली तो बंद कर दी। फिर संतरे के कारोबार में अच्छी-खासी कमाई करने वाला पवन उनके झांसे में आ गया। पवन को चिकित्सा के क्षेत्र में घोर संभावनाएं दिखाकर आरके सिंह ने अपने जाल में फंसा लिया। पवन के पास पैसा था, लेकिन सड़क के किनारे जमीन नहीं होने के कारण नारायण यादव की जमीन को लीज पर ले लिया। उस पर अपने पैसे से तीन रूम की एक क्लीनिक खोल दी। पवन एवं नारायण यादव दोनों इसके संचालक बन गए और आरके सिंह सर्जन।

ससुर से कंपाउंडरी का सीखा हुनर

आरके सिंह अपने साथ जितेंद्र कुमार को ओटी असिस्टेंट के रूप में काम करने के लिए लाता था। आरके सिंह के पास कोई डिग्री नहीं रहते हुए भी अपने ससुर मजीदिया निवासी प्यारे सिंह से कंपाउंडरी का हुनर सीखा। उसके बाद उसने अपने बलबूते झोलाछाप प्रैक्टिस करनी शुरू कर दी। वह खुद नउवाचक में न रहकर मुजफ्फरपुर स्थित कच्ची पक्की के समीप अपना घर बनाकर रहता है। छोटे-छोटे निजी नर्सिंग होम में बतौर फिजीशियन एवं सर्जन का काम करता है। उसने फर्जी नर्सिंग होम को खड़ी कर अच्छी-खासी संपत्ति हासिल की है।

कई और क्लीनिक जांच की जद में

चांदपुर फतह चौक के समीप स्थित जीवन सहारा क्लीनिक में बतौर ओटी असिस्टेंट काम कर रहे जितेंद्र कुमार को वह अपने साथ रखा था, लेकिन कुछ लोगों फल विक्रेता ने संतरा बेचना छोड़ शुरू कर दी सर्जरी…बिहार के डाक्टर को हुए ज्ञान की हैरान करने वाली कहानी

मुजफ्फरपुर।इस खबर को एक सवाल के साथ शुरू कर रहा हूं। कोई फल विक्रेता बहुत अधिक तरक्की कर ले तो क्या बन सकता है? आपका जवाब होगा कि यदि वह वेंडर है तो थोक विक्रेता बन सकता है। इससे अधिक सोचा भी नहीं जा सकता है। यदि मैं कहूं कि एक फल विक्रेता सर्जन बन जाए तो शायद सामने से आप कहें कि दिमाग खराब हो गया है क्या, किंतु सच्चाई यही है। बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित सकरा में एक फल विक्रेता झोला छाप डाक्टर के संपर्क में आया। इन दोनों की दोस्ती से एक फल विक्रेता झोला छाप सर्जन बन गया। एक महिला की दोनों किडनी चोरी करने में उसका नाम आया है।

 

अधिक पैसा कमाने की चाहत

 

भूटान एवं दिल्ली में रहकर संतरे का व्यवसाय करने वाले पवन ने सपने में भी नहीं सोचा था कि उसके नाम के आगे ‘डाक्टर’ लिखा जाएगा, लेकिन यह कर दिखाया वैशाली के पातेपुर थाना क्षेत्र के नउवा चक निवासी एक फर्जी चिकित्सक आरके सिंह ने। आरके सिंह बरियारपुर में निजी प्रैक्टिस करने के लिए चार वर्ष पहले आया था। कुछ दिनों तक प्रैक्टिस की, लेकिन दुकान नहीं चली तो बंद कर दी। फिर संतरे के कारोबार में अच्छी-खासी कमाई करने वाला पवन उनके झांसे में आ गया। पवन को चिकित्सा के क्षेत्र में घोर संभावनाएं दिखाकर आरके सिंह ने अपने जाल में फंसा लिया। पवन के पास पैसा था, लेकिन सड़क के किनारे जमीन नहीं होने के कारण नारायण यादव की जमीन को लीज पर ले लिया। उस पर अपने पैसे से तीन रूम की एक क्लीनिक खोल दी। पवन एवं नारायण यादव दोनों इसके संचालक बन गए और आरके सिंह सर्जन।

 

ससुर से कंपाउंडरी का सीखा हुनर

 

आरके सिंह अपने साथ जितेंद्र कुमार को ओटी असिस्टेंट के रूप में काम करने के लिए लाता था। आरके सिंह के पास कोई डिग्री नहीं रहते हुए भी अपने ससुर मजीदिया निवासी प्यारे सिंह से कंपाउंडरी का हुनर सीखा। उसके बाद उसने अपने बलबूते झोलाछाप प्रैक्टिस करनी शुरू कर दी। वह खुद नउवाचक में न रहकर मुजफ्फरपुर स्थित कच्ची पक्की के समीप अपना घर बनाकर रहता है। छोटे-छोटे निजी नर्सिंग होम में बतौर फिजीशियन एवं सर्जन का काम करता है। उसने फर्जी नर्सिंग होम को खड़ी कर अच्छी-खासी संपत्ति हासिल की है।

 

 

कई और क्लीनिक जांच की जद में

 

चांदपुर फतह चौक के समीप स्थित जीवन सहारा क्लीनिक में बतौर ओटी असिस्टेंट काम कर रहे जितेंद्र कुमार को वह अपने साथ रखा था, लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि जितेंद्र पवन की क्लीनिक पर नहीं आता था। हालांकि सकरा एवं बरियारपुर पुलिस ने रविवार को पातेपुर स्थित जीवन सहारा क्लीनिक पर छापेमारी की, जहां चिकित्सक एवं ओटी असिस्टेंट गायब मिले।  कहना है कि जितेंद्र पवन की क्लीनिक पर नहीं आता था। हालांकि सकरा एवं बरियारपुर पुलिस ने रविवार को पातेपुर स्थित जीवन सहारा क्लीनिक पर छापेमारी की, जहां चिकित्सक एवं ओटी असिस्टेंट गायब मिले।

Kunal Gupta

9 साल का पत्रकारिता का अनुभव।प्रभात खबर में कार्यरत, साथ ही बिहार न्यूज tv, आज अख़बार, दैनिक भास्कर में कार्य का अनुभव।कंटेट राइटर, एडिटिंग का कार्य,पत्रकारिता की हर विधा को सीखने की लगन।

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