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निजी स्कूलों की मनमानी:एनसीईआरटी की सलाह भी नहीं मानते,आधे स्कूलों में पीने का पानी नहीं ।

बिहार में निजी स्कूलों की मनमर्जी के कारण बच्चों के बस्ते का बोझ कम नहीं हो रहा है। एनसीईआरटी ने सुझाव दिया था कि कक्षा एक और दो में तीन विषय की ही पढ़ाई एक दिन में हो। तीसरी से पांचवीं तक चार विषय की और छठी से दसवीं तक एक दिन में छह विषय से अधिक कक्षाएं न चलें। वहीं, एलकेजी और यूकेजी के बच्चे बिना किताब के स्कूल आएं, लेकिन इस सुझाव को सूबे के 90 निजी स्कूल नहीं मानते हैं।

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एलकेजी के बच्चों का बस्ता पांच किलो से ज्यादा

ज्यादातर स्कूल ऐसा रूटीन बनाते हैं, जिससे छात्रों को हर दिन हर विषय की किताबें लानी होती है। इसके अलावा एक या दो नोट बुक लाने का सुझाव भी कोई स्कूल नहीं मानता है। यहां तक कि एलकेजी व यूकेजी के बच्चों को भी 4 से 5 किताबें लानी पड़ती है। इससे बस्ते का वजन पांच किलो से ज्यादा हो जाता है।

पीने के पानी की व्यवस्था नहीं

यू-डायस रिपोर्ट के अनुसार बिहार के 50 फीसदी ऐसे निजी स्कूल हैं, जहां बच्चों के लिए शुद्ध पानी की व्यवस्था नहीं है। बच्चों को घर पीने का पानी लाना पड़ता है। इसका बोझ भी बस्ते पर बढ़ जाता है।

2005 से बने थे ये नियम, अब तक लागू नहीं

● मानव संसाधन मंत्रालय के यशपाल कमेटी की रिपोर्ट पर 2005 में लर्निंग विदाउट बर्डन लागू किया गया

2006 में चिल्ड्रेन स्कूल बैग बिल पास हुआ इसमें बैग हल्का करना था

● केंद्रीय विद्यालय संगठन ने 29 दिसंबर 2009 को स्कूल बैग हल्का करने का नियम लागू किया

● महाराष्ट्र सरकार ने 2015 में स्कूल बैग हल्का करने का निर्देश जारी किया

● हर विषय की पढ़ाई रोज होने से सभी किताबें लानी पड़ती हैं बच्चों को

● स्कूल रूटीन बनाने से पहले इस बात पर नहीं देते हैं ध्यान

● एलकेजी व यूकेजी तक के बच्चों को लानी पड़ती हैं चार-चार किताबें

क्या कहते हैं स्कूल संचालक

जो सुझाव आएगा उसे लागू किया जायेगा। पहले जो सुझाव सीबीएसई द्वारा दिया गया है, वह कुछ-कुछ ही लागू है। छोटी कक्षाओं में कुछ लागू हुए हैं। – राजीव रंजन, प्राचार्य, वाल्डविन

स्कूल के शेड्यूल में बदलाव किया जायेगा। बच्चे के बस्ता को हल्का किया जायेगा। बच्चों का बस्ता काफी भारी होता है, इसे हम महसूस करते हैं। – एफ हसन, निदेशक, इंटरनेशनल स्कूल

हम खुद इस समस्या से चिंतित हैं। बच्चों का बस्ता बहुत ज्यादा भारी होता है। इसके लिए जो भी सुझाव आयेगा, उसे लागू किया जायेगा। अभी तक कुछ नहीं कर पाये हैं। -फादर क्रिस्टू , प्राचार्य, सेंट जेवियर्स हाई स्कूल

एनसीईआरटी द्वारा दिये गये सुझाव बढ़िया हैं। छोटी कक्षा में तो किताबें कम लाने को कहा जाता है, लेकिन बड़े बच्चे का बैग भारी होता है। – ब्रदर माइक, प्राचार्य, लोयला माउंटफोर्ट स्कूल

Kunal Gupta

9 साल का पत्रकारिता का अनुभव।प्रभात खबर में कार्यरत, साथ ही बिहार न्यूज tv, आज अख़बार, दैनिक भास्कर में कार्य का अनुभव।कंटेट राइटर, एडिटिंग का कार्य,पत्रकारिता की हर विधा को सीखने की लगन।

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