महंगाई से सूखे नींबू के रस, बीते साल से दोगुनी हुई कीमत
बेगूसराय । पेट्रोलियम, खाद्य तेल, हरी सब्जियों के बाद अब नींबू पर महंगाई की मार पड़ी है। आम तौर पर एक से दो रुपये में बिकने वाला नींबू की कीमत 10 रुपये में एक हो गया है। बाजार के थोक भाव की भी बात करें तो नींबू 600- 700 रुपये सैकड़ा से कम कीमत पर उपलब्ध नहीं है। प्री मानसून के बाद अब प्री हीट वेब कारण जिस अनुपात में नींबू की मांग भी बढ़ी है, उस अनुपात में आपूर्ति नहीं हो रही है। परिणाम यह है कि सब्जी वाले के ठेले पर भी नींबू गिनती के हिसाब से ही दिख रहे हैं। फिलहाल नींबू की महंगाई कम नहीं होने वाली है लेकिन अगले 15 दिनों में भाव गिरने व नींबू के सस्ती होने के आसार हैं।
गर्मी में बढ़ती है नींबू की मांग :
आमतौर पर नींबू साल भर उपयोग किया जाने वाला फल है। बिटामिन सी की प्रचुरता वाले इस फल को जहां गर्मी से बचने के घरेलू उपयोग में लाया जाता है वहीं गन्ना, सत्तू समेत कई अन्य शीतल पेय में नींबू का उपयोग किए जाने से नींबू की व्यवसायिक मांग भी बढ़ जाती है। कोरोना काल में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढाने के लिए नींबू की बढ़ी मांग के बीच भी दाम पांच रुपये तक सीमित रहे थे लेकिन वर्तमान समय से नींबू 10 रुपये में मिल रहे हैं।
प्री मानसून के कारण बर्बाद हुई फसल :
चट्टी स्थित सब्जी मंडी में तीन दशक से नींबू का कारोबार कर रहे संतोष कुमार बताते हैं कि अभी आंध्र प्रदेश और चेन्नई से नींबू की आवक होती है। प्री मानसून व साइक्लोन की मार से नींबू की फसल प्रभावित हुई है। नींबू के फूल के झड़ने और बीते साल नींबू उपजाने वाले किसानों को घाटा लगने के कारण किसान की बेरूखी का असर भी नींबू उत्पादन पर पड़ा है। वे बताते हैं कि मोल नींबू का नहीं समय का है।
15 दिन बाद सस्ती होने के आसार :
नींबू का कारोबार करने वाले कुंदन कुमार बताते हैं कि मई से बंगाल से नींबू की आवक होने लगेगी। इससे भाव में कमी आएगी। जुलाई अगस्त के बाद स्थानीय उपज की आवक भी होने लगेगी, इससे भी बढ़ती महंगाई कम होने के आसार हैं। बेगूसराय में नींबू का थोक व्यवसाय करने वाले आधा दर्जन से अधिक व्यवसायियों ने बताया कि अगले माह तक ही नींबू की महंगाई पर नियंत्रण हो सकता है।
टूटा 24 साल का रिकार्ड :
नींबू की महंगाई की चर्चा करने पर व्यवसायी सोच में पड़ जाते हैं। व्यवसायियों का कहना है कि नींबू की महंगाई ने बीते 24 साल का रिकार्ड तोड़ दिया है। इसके पूर्व 1998 में नींबू 10 हजार रुपये प्रति बोरा तक बिका था। उस समय भी बढ़ी महंगाई का कारण प्राकृतिक आपदा ही थी। नींबू उत्पादक राज्यों में फसल बर्बाद होने से ही नींबू महंगी हुई थी। अगस्त तक देशी नींबू आने लगेंगे और बढे भाव पर लगाम लगेगी।
9 साल का पत्रकारिता का अनुभव।प्रभात खबर में कार्यरत, साथ ही बिहार न्यूज tv, आज अख़बार, दैनिक भास्कर में कार्य का अनुभव।कंटेट राइटर, एडिटिंग का कार्य,पत्रकारिता की हर विधा को सीखने की लगन।
