पटना में पांच सौ मीटर पर तापमान में 10 डिग्री का बड़ा अंतर, जानें कौन सा इलाका रहता है सबसे ठंडा
मृत्युंजय मानी, पटना: पटना में पांच सौ मीटर की दूरी पर तापमान में 10 डिग्री का बड़ा अंतर है। बिहार राज्य जैव विविधता पर्षद द्वारा पिछले साल सेटेलाइट से कराए गए अध्ययन में यह सच्चाई सामने आई है। रिपोर्ट 14 अप्रैल 2021 की है, जिसे अब जारी किया गया है। पेड़-पौधों व जलाशयों से भरपूर संजय गांधी जैविक उद्यान में एक ही समय पर तापमान 30 डिग्री तो महज पांच सौ मीटर दूर पटना एयरपोर्ट के कंक्रीट के रनवे पर 40 डिग्री तापमान रिकार्ड किया गया है। उसी दिन एयरपोर्ट के बाहरी भाग वेटनरी कालेज के पास तापमान 37 डिग्री था। रिपोर्ट से स्पष्ट है कि जहां जल-जीवन-हरियाली है, वहां गर्मी से काफी राहत है। जहां हरियाली का नामोंनिशान नहीं है, वहां प्रचंड गर्मी है।
पर्षद ने पटना नगर निगम के सभी 75 वार्डों के नक्शे के साथ 2021-22 के वार्षिक प्रतिवेदन में यह रिपोर्ट प्रस्तुत की है। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि भूमि की सतह में परिवर्तन कंक्रीट और डामर के कारण होता है। वृक्षाच्छादन, आर्द्रभूमि का विकास, छत पर बागवानी तथा ऊध्र्वाधर उद्यान (वर्टिकल गार्डेन) लगाने से ग्लोबल वार्मिंग को लोकल स्तर पर चुनौती दी जा सकती है। पृथ्वी की गर्मी बढ़ने से रोका जा सकता है।
नोबेल पुरस्कार विजेता स्यूकुरो मानेबे के माडल पर कराया गया अध्ययन
पर्षद के जीआइएस एंड रिमोट सेंसिंग आफिसर भवेश कुमार ने नोबेल पुरस्कार विजेता स्यूकुरो मानेबे (भैतिकी) के माडल का अनुकरण कर सेटेलाइट से ग्रीन हाउस गैस व भूमि की सतह का अध्ययन कराया गया। बीते वर्ष 14 अप्रैल 2021 को पटना नगर निगम के सभी 75 वार्डों की वस्तुस्थिति परखी गई। पटना में अलग-अलग जगह पर केवल पेड़ों के होने या न होने से आसपास में ही तीन-चार स्तर का तापमान मिला। वार्ड 27 में गांधी मैदान के आसपास (जहां पेड़ बचे हैं और मैदान है) 37 डिग्री तथा गंगा किनारे वाले भाग में 36 डिग्री तापमान रिकार्ड किया गया। वार्ड 22, 28, 29, 35, 36 में 39 से 40 डिग्री तापमान रिकार्ड किया गया। वेटलैंड में 33 डिग्री के आसपास तापमान मिला। बिहार राज्य जैव विविधता पर्षद ने अपने कार्यालय में जीआइएस लैब स्थापित किया है। इसी लैब में अध्ययन किया गया है।
कंक्रीट वाले क्षेत्र में अधिक तापमान
भवेश बताते हैं कि पेड़-पौधे, ग्रीन लैंड, जल स्रोतों के आसपास तापमान में काफी कमी पाई गई है। यह बात हमारे किसान और पुरखे पीढ़ी दर पीढ़ी सुनते व जानते आ रहे थे, इसलिए पेड़ और बगीचे लगाते थे। बढ़ती आबादी के कारण जितनी तेजी से मकान, सड़क, अपार्टमेंट और मॉल बनाने के लिए पेड़ काटे गए, उतनी ही तेजी से धरती के उस इलाके में तापमान बढ़ता गया। पटना में एक समान तापमान सभी जगहों पर नहीं है, क्योंकि हर जगह न हरियाली समान है, न आबादी का घनत्व बराबर है।
9 साल का पत्रकारिता का अनुभव।प्रभात खबर में कार्यरत, साथ ही बिहार न्यूज tv, आज अख़बार, दैनिक भास्कर में कार्य का अनुभव।कंटेट राइटर, एडिटिंग का कार्य,पत्रकारिता की हर विधा को सीखने की लगन।
