Patna

बच्चों नहीं, शिक्षकों को अनुशासित रखने के लिए शिक्षा विभाग का अजीबोगरीब फरमान, हर कोई हैरान

पटना।मधेपुरा। शिक्षा विभाग ने संगीत शिक्षकों के लिए एक अजीबोगरीब फरमान जारी किया है। शनिवार से आयोजित होने वाले तीन दिवसीय सिंहेश्वर महोत्सव में पांच प्रखंडों के संगीत शिक्षकों को सपरिवार आने का आदेश जारी किया गया है। डीएम के निर्देश पर डीईओ द्वारा यह पत्र जारी किया गया है। शिक्षक संघों ने विभाग के इस आदेश को गलत बताया है।संघ परिवार के साथ बुलाए जाने को और भी आपत्तिजनक बता रही है।

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पर्यटन विभाग व जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में सिंहेश्वर में शनिवार से सोमवार तक तीन दिवसीय महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है। इसके लिए डीएम के निर्देश पर डीईओ ने मधेपुरा, सिंहेश्वर, शंकरपुर, गम्हरिया व घैलाढ़ के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को पत्र जारी किया है। बीईओ को जारी पत्र में डीईओ ने कहा है कि 12 से 14 मार्च तक आयोजित सिंहेश्वर महोत्सव के सभी संगीत शिक्षक अपने परिवार के साथ अचूक रूप से उपस्थित होना सुनिश्चित करेंगे। डीईओ ने पत्र में कहा है कि महोत्सव में विभिन्न कलाकार द्वारा कला की प्रस्तुति की जाएगी। कला की बारीकियों को सीखने, समझने व उत्साहित करने का यह बेहतरीन मंच है।

 

डीईओ द्वारा जारी इस पत्र का जिला माध्यमिक शिक्षक संघ व बिहार प्रदेश प्रारंभिक शिक्षक संघ ने कड़ा विरोध किया है। वहीं डीईओ ने इस आदेश को सही बताया है।

 

विभाग द्वारा संगीत शिक्षकों के साथ उनके परिवार वालों को महोत्सव में आने को निर्देशित करने का आदेश देने गलत है। शिक्षक के परिवार पर विभाग का आदेश चलाना अनुचित है। विभाग कैसे उनके परिवार पर आदेश चला सकता है। संघ विभाग के इस निर्णय की आलोचना करती है। विभाग का यह आदेश बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। -प्रदीप कुमार पप्पू, प्रदेश अध्यक्ष,बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ

 

 

शिक्षा विभाग द्वारा संगीत शिक्षकों को परिवार के साथ महोत्सव में बुलाए जाने का आदेश बिल्कुल गलत है। संघ इस निर्णय की भत्सर्ना करती है। संगीत शिक्षको को उनके परिवार के साथ अनिवार्य रूप से उपस्थित होने का आदेश नहीं दिया जा सकता है। विभाग उनके परिवार वालों पर अपना आदेश नहीं चला सकती है। ऐसा नही होना चाहिए था। -कृष्ण कुमार यादव, अध्यक्ष, जिला माध्यमिक शिक्षक संघ,मधेपुरा

 

महोत्सव में नामी कलाकार आएंगे। उनको सुनने देखने से संगीत शिक्षकों का रिफ्रेशर ट्रेनिंग हो जाएगा। शिक्षक कला के गूढ़ रहस्य को सीखेंगे जिससे बच्चों को लाभ मिलेगा। परिवार वालों कर साथ शिक्षक को इसीलिए आने को कहा गया है ताकि वो अनुशासन में रहें। वहीं महोत्सव में नहीं आने वाले शिक्षकों के विरूद्ध क्या करना है यह बाद में सोचेंगे। उन्हें आने के लिए आदेशित ही न किया जाएगा। या हम हाथ पांव जोड़कर उन्हें कहे कि आ जाइए। -बीरेंद्र नारायण, डीईओ,मधेपुर

Kunal Gupta

9 साल का पत्रकारिता का अनुभव।प्रभात खबर में कार्यरत, साथ ही बिहार न्यूज tv, आज अख़बार, दैनिक भास्कर में कार्य का अनुभव।कंटेट राइटर, एडिटिंग का कार्य,पत्रकारिता की हर विधा को सीखने की लगन।

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