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त्रिपुरा से बाईक पर सवार होकर पहुंचे झारखंड,जानिए जुनून से भरे इस लड़के की कहानी

नई दिल्ली।Tripura To Jharkhand Tour त्रिपुरा के शेषाद्रि भूषण मालाकार मोटरसाईकल पर सवार हो कर विभिन्न राज्यों का गीत-संगीत जानने निकले। अपने इस सफर की शुरुआत बीते वर्ष सितंबर महीने में कश्मीर से की। शेषाद्रि अपने मोटरसाईकल से देश के उत्तर-दक्षिण यानी कन्याकुमारी से कश्मीर तक का सफर तय कर चुके है। अब पूरब से पश्चिम का सफर तय कर रहे है। इस क्रम में झारखंड की राजधानी पहुंचे। शेषाद्रि ने कहा कि बिहार से झारखंड में प्रवेश करने वक्त लगता है जैसे यहां के पहाड़ और हशीन वादियां स्वागत कर रही हो। शेषाद्रि के साथ उनके इस संगीतमय सफर पर बात-चित के कुछ प्रमुख अंश।

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बाकी सब राज्यों से झारखंड की प्राकृतिक का मिठास कितना है

 

 

मैन सुना था कि झारखंड में हरियाली अधिक है। मैं अपने सफर के दौरान जब बिहार से झारखंड में प्रवेश किया तो ऐसा लगा कि यहां के पहाड़ और ये हशीन वादियां मेरी स्वागत कर रही हो। मुझे यहां का पहाड़ अपने त्रिपुरा के पहाड़ जैसी ही महसूस हुआ।

 

 

यहां की लोकनृत्य-संगीत आपके हृदय के कितने करीब तक पहुंची

 

 

झारखंड के झुमर ताल ने मुझे काफी आकर्षित किया है। इसके साथ ही वीर सेरेन, झीका, फिलसंझा, डोड आदि लोक गीत भी काफी मजेदार हैं। साथ ही नृत्य में हल्के व गंभीर रूप से, पशु और पक्षी के व्यवहार को भी मिश्रित किया गया है। इससे यह पता चलता है कि यहां के लोग कितने नेचर फ्रेंडली है। उन्होंने अपनी बात में आगे कहा कि यहां के गांव के लोगों के साथ मै भोजन किया। भोजन में भात और सब्जी के साथ हरे पत्ते की चटनी खाया, यह काफी स्वादिष्ट था।

 

 

 

झारखंड से आपका पूर्व लगाव या फिर कोई कनेक्शन

 

झारखंडी कलाकार व फिल्म निदेशक नंदलाल नायक का फिल्म धुमकुड़िया का गीत मैंने लिखा था। उस वक्त से नंदलाल नायक से मेरा परिचय हुआ। मैंने अपने सफर के दौरान जब झारखंड के वादियों में पहुंचा तो उनसे भी रूबरू हुआ। उन्होंने राज्य की खूबसूरती के बारे में जो बताया था मैं हकीकत में देख रहा हूं।

संगीत में क्या है उपलब्धियां

 

इंडिया बुक आफ रिकार्ड 2013 में पियानो व कीबोर्ड पर 900 की प्रति मिनट दबाने का रिकार्ड है। यानी 15 की प्रति सेकंड का एक रिदम पर किया गया था।

 

 

 

इस सफर का मुख्य उद्देश्य

 

इस पर शेषाद्रि कहते है कि वे एक आर्टिस्ट है और आर्टिस्ट को अपने आर्ट में निखार लाने के लिए अपने देश के कल्चर को जानना बहुत जरूरी है। मैं जहां भी जाता हूं वहां का मुख्य गीत-संगीत के साथ-साथ प्राकृतिक खूबसूरती को भी अपने कैमरे में कैद कर लेता हूं जिससे मैं अपनी संगीत को और बेहतर कर सकूं। प्रकृतिक की खूबसूरती पर ही कई गीत लिखे और गाए गए है। यह सब गीत एवर ग्रीन होती है।

Kunal Gupta

9 साल का पत्रकारिता का अनुभव।प्रभात खबर में कार्यरत, साथ ही बिहार न्यूज tv, आज अख़बार, दैनिक भास्कर में कार्य का अनुभव।कंटेट राइटर, एडिटिंग का कार्य,पत्रकारिता की हर विधा को सीखने की लगन।

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